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Last Updated :जम्‍मू , शुक्रवार, 6 मार्च 2026 (21:38 IST)

Kashmir global warming impact : कश्मीर में कुदरत का कहर, झेलम नदी सूखी, गुलमर्ग में मार्च की गर्मी ने तोड़ा रिकॉर्ड

Kashmir climate crisis 2026
कश्मीर में इस मार्च में मौसम का अजीब पैटर्न देखने को मिल रहा है, झेलम नदी का पानी जीरो गेज मार्क से नीचे चला गया है और गुलमर्ग में महीने के पहले हफते में 17.2 डिग्री का ऐतिहासिक तापमान रिकार्ड किया गया है, जिससे एक्सपर्ट्स कम बर्फबारी और बढ़ते तापमान के असर को लेकर चिंता में हैं।
फ्लड कंट्रोल विभाग द्वारा मुहेया करवाए गए आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार सुबह 9 बजे दक्षिण कश्मीर के संगम पर झेलम नदी माइनस 0.86 फीट पर बह रही थी, जो जीरो लेवल से नीचे डिस्चार्ज दिखाता है, जो मार्च की शुरुआत के लिए एक असामान्य बात है जब धीरे-धीरे बर्फ पिघलने से आमतौर पर नदी का बहाव बढ़ जाता है।
 
स्‍वतंत्र मोसम विज्ञानी फैजान आरिफ कहते थे कि नदी का असामान्य रूप से कम लेवल सर्दियों में कम बारिश और घाटी के ऊंचे इलाकों में कम बर्फ जमा होने को दिखाता है। फैजान के बकौल, मार्च की शुरुआत में आमतौर पर नदी के लेवल में काफी बढ़ोतरी देखी जाती है क्योंकि पहाड़ों में बर्फ धीरे-धीरे पिघलने लगती है। इस साल फरवरी में गर्म मौसम के बावजूद बढ़ोतरी थोड़ी देर के लिए और कम थी। वे कहते थे कि यह स्थिति खराब स्नोपैक और इस सर्दी में देखे गए असामान्य तापमान पैटर्न से जुड़ी है।
उनका कहना था कि इतिहास में पहली बार, गुलमर्ग में मार्च के पहले सप्‍ताह में 17.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकार्ड किया गया है, जो नार्मल से 13.7 डिग्री अधिक है और वहां रिकार्ड किए गए अब तक के सबसे अधिक 18 डिग्री सेल्सियस तापमान के बहुत करीब है।
 
हालांकि मौसम विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि गुरुवार को पूरे जम्मू कश्मीर में दिन का तापमान नार्मल से काफा ज्‍यादा रहा। आंकड़ों के मुताबिक, श्रीनगर में, तापमान 24.7 डिग्री रहा, जो नार्मल से 11.7 डिग्री अधिक है, जबकि काजीगुंड में 24.6 डिग्री रिकार्ड किया गया, जो नार्मल से लगभग 12 डिग्री अधिक था।
 
इसी तरह से पहलगाम में 20.8 डिग्री और कुपवाड़ा में 23.7 डिग्री रिकार्ड किया गया, दोनों ही सीजनल एवरेज से 10 उिग्री अधिक था। जबकि जम्मू इलाके में, जम्मू शहर में 32.4 डिग्री रिकार्ड किया गया, जो सामान्‍य से 8.1 डिग्री अधिक है, जबकि बनिहाल, बटोत और भद्रवाह समेत कई दूसरे स्टेशनों पर भी तापमान नार्मल से 10 डिग्री अधिक रिकार्ड किया गया।
हालांकि मौसम विभाग ने बताया कि पिछले 24 घंटों में जम्मू कश्मीर में कोई बारिश नहीं हुई और पूरे केंद्र शासित प्रदेश में मौसम सूखा रहा। जबकि खेती के जानकारों का कहना है कि झेलम में पानी का घटता लेवल धान की नर्सरी तैयार करने के जरूरी समय में सिंचाई पर असर डाल सकता है, जो अप्रैल में शुरू होता है।
 
दक्षिण कश्मीर के जिलों के किसानों का कहना था कि धान की नर्सरी बोने के लिए अप्रैल और मई के दौरान पानी का होना बहुत जरूरी है। पुलवामा के एक किसान गुलाम मोहम्मद भट के बकौल, हम झेलम से मिलने वाली नहरों और पहाड़ों से आने वाली धाराओं पर निर्भर हैं। अगर पानी का लेवल कम रहा, तो नर्सरी तैयार करने में देरी हो सकती है।
 
वैसे सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना था कि हालात पर करीब से नजर रखी जा रही है। एक अधिकारी का कहना था कि अभी कोई तुरंत संकट नहीं है, लेकिन ट्रेंड अच्छा नहीं है। अगर आने वाले समय में अच्छी बारिश या देर से बर्फबारी नहीं होती है, तो इससे सिंचाई की प्लानिंग पर असर पड़ सकता है। झेलम, जो कश्मीर घाटी से होकर बहती है और कई जिलों में खेती को बनाए रखती है, सर्दियों में होने वाली बर्फबारी और वसंत में पिघले पानी पर बहुत अधिक निर्भर करती है।
फैजान कहते थे कि आने वाले सप्‍ताह यह तय करने में अहम होंगे कि हालात सुधरते हैं या नहीं। उनका कहना था कि अगर मार्च में नार्मल बारिश होती है, तो कुछ रिकवरी हो सकती है। नहीं तो यह इस इलाके के लिए मुश्किल पानी वाले साल की शुरुआती चेतावनी हो सकती है। (file photos) Edited by : Sudhir Sharma
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