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Last Updated :नई दिल्ली , शुक्रवार, 6 मार्च 2026 (16:41 IST)

LPG : देश में तेल, रसोई गैस की किल्लत नहीं होगी, भारत के पास जरूरत से ज्यादा सप्लाई, जानिए कैसे होता है एलपीजी का प्रोडक्शन

MoPNG LPG production order 2026
मिडिल ईस्ट में युद्ध संकट के चलते वैश्विक ईंधन आपूर्ति में पैदा हुई बाधाओं के बीच, भारत सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने देश की सभी तेल शोधन (Refining) कंपनियों को आदेश दिया है कि वे एलपीजी (LPG) के उत्पादन को अधिकतम स्तर पर ले जाएं।

'एसेंशियल कमोडिटी एक्ट' लागू, पेट्रोकेमिकल्स पर रोक

5 मार्च 2026 को जारी इस आदेश में सरकार ने अनिवार्य वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act) और पेट्रोलियम उत्पाद आदेश, 1999 की शक्तियों का इस्तेमाल किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि तेल कंपनियां अब प्रोपेन और ब्यूटेन (LPG के मुख्य घटक) का इस्तेमाल पेट्रोकेमिकल उत्पादों या अन्य डेरिवेटिव बनाने के लिए नहीं कर सकेंगी।
 
मंत्रालय का आदेश: 'भारत में कार्यरत सभी तेल रिफाइनिंग कंपनियां यह सुनिश्चित करेंगी कि उनके पास उपलब्ध प्रोपेन और ब्यूटेन की धाराओं का उपयोग केवल एलपीजी उत्पादन के लिए हो और इसे अनिवार्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र की तीन कंपनियों—IndianOil, HPCL और BPCL—को उपलब्ध कराया जाए।'
 

केवल घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगी गैस

आदेश में सख्त निर्देश दिए गए हैं कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) यह सुनिश्चित करें कि इस तरह उत्पादित एलपीजी की मार्केटिंग और सप्लाई केवल घरेलू उपभोक्ताओं के लिए ही की जाए। इसका मतलब है कि औद्योगिक कार्यों के बजाय अब आम आदमी की रसोई को प्राथमिकता दी जाएगी।
 

क्यों लेना पड़ा यह फैसला?

वैश्विक संकट: पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण ग्लोबल फ्यूल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।
सप्लाई सुरक्षा: सरकार चाहती है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों या कमी का असर भारतीय रसोइयों पर न पड़े।
डायवर्जन पर रोक: कंपनियां मुनाफे के चक्कर में प्रोपेन/ब्यूटेन का इस्तेमाल प्लास्टिक या केमिकल बनाने में न करें, इसलिए यह प्रतिबंध लगाया गया है।
 

कैसे होता है एलपीजी का प्रोडक्शन

 एलपीजी (LPG) यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस के बनने की प्रक्रिया काफी दिलचस्प है। यह कोई प्राकृतिक गैस नहीं है जो सीधे जमीन से निकलती है, बल्कि इसे अन्य ईंधनों को रिफाइन (साफ) करते समय प्राप्त किया जाता है।यहाँ आसान भाषा में इसका प्रोडक्शन प्रोसेस दिया गया है:

1. कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस (Raw Material)एलपीजी मुख्य रूप से दो स्रोतों से आती है:

प्राकृतिक गैस का कुआं
जब जमीन से नैचुरल गैस निकाली जाती है, तो उसमें मीथेन के साथ-साथ प्रोपेन और ब्यूटेन भी होते हैं।कच्चा तेल (Crude Oil): जब रिफाइनरी में कच्चे तेल को साफ किया जाता है, तब भी यह गैस उप-उत्पाद (By-product) के रूप में निकलती है।

2. रिफाइनिंग प्रोसेस

रिफाइनरी में कच्चे तेल को एक बड़े टावर में बहुत ऊंचे तापमान पर गर्म किया जाता है। इस प्रक्रिया को फ्रैक्शनल डिस्टिलेशन कहते हैं।जैसे-जैसे तेल गर्म होता है, अलग-अलग पदार्थ अलग-अलग तापमान पर भाप बनकर ऊपर उठते हैं।हल्की गैसें (जैसे प्रोपेन और ब्यूटेन) टावर के सबसे ऊपरी हिस्से में जमा हो जाती हैं।

3. गैसों का मिश्रण

एलपीजी मुख्य रूप से दो गैसों का मिश्रण है: प्रोपेन और ब्यूटेन ।ठंडे इलाकों में प्रोपेन की मात्रा ज्यादा रखी जाती है ताकि गैस आसानी से जल सके।भारत जैसे गर्म देशों में ब्यूटेन की मात्रा अधिक रखी जाती है।

4. गैसीय अवस्था से तरल
यहीं से इसका नाम 'लिक्विफाइड' पड़ा है। इन गैसों पर बहुत अधिक दबाव (Pressure) डाला जाता है या इनका तापमान बहुत कम किया जाता है। इससे ये गैसें तरल (Liquid) बन जाती हैं। तरल बनाने का फायदा यह है कि इसे छोटे सिलेंडर में बहुत अधिक मात्रा में भरा जा सकता है।

5. गंध मिलाना 
प्राकृतिक रूप से एलपीजी में कोई गंध (Smell) नहीं होती। सुरक्षा के लिए इसमें 'इथाइल मरकैप्टन' (Ethyl Mercaptan) नाम का केमिकल मिलाया जाता है, ताकि अगर गैस लीक हो, तो हमें तुरंत पता चल सके। Edited by : Sudhir Sharma