सिडनी ओलंपिक 2000: जब कर्णम मल्लेश्वरी ने उठाया भारतीय उम्मीदों का बोझ

Karnam Malleswari
Last Updated: शुक्रवार, 16 जुलाई 2021 (15:07 IST)
इक्कसवी सदी की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया की क्रिकेट में बादशाहत चरम पर थी लेकिन
साल 2000 में सिडनी में खेलों के महाकुंभ का आयोजन किया गया। भारत ने इस ओलंपिक के लिए कुल 65 खिलाड़ियों का दल सिडनी रवाना किया जिसमें 44 पुरुष खिलाड़ी थे और 21 महिला खिलाड़ी थी।
उस वक्त जब जब भारत की टीम ऑस्ट्रेलिया का दौरा करती थी तो बमुश्किल 1 या 2 मैच जीत पाती थी। कुछ ऐसा ही सूरत ए हाल सिडनी ओलंपिक में भी रहा। हालांकि15 सितंबर से लेकर 1 अक्टूबर तक चले इन ओलंपिक खेलों में भारत का खाता चौथे दिन ही खुल गया था।

मेडल के लिए भारत की उम्मीदों का बोझ उठाया आंध्र के श्रीकाकुलम में जन्मी कर्णम मल्लेश्वरी ने जिन्होंने 69 किलो ग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीता। इस मुकाबले में चीन की लिन वेनिंग ने गोल्ड और हंगरी की इर्सबेट मार्कस ने सिल्वर मेडल जीता।

दिलचस्प बात यह रही की प्रारंभिक स्तर के स्नैच कैटेगरी में मल्लेश्वरी स्वर्ण पदक जीतने वाली खिलाड़ी से महज 2.5 अंक पीछे थी और कुल स्कोर के बाद वह दोनों खिलाड़ियों से सिर्फ 2.5 अंक पीछे रही।

मल्लेश्वरी ने 19 सितम्बर, 2000 को सिडनी ओलम्पिक में देश की पहली महिला ओलम्पिक मेडलिस्ट होने का गौरव हासिल किया था। तब मल्लेश्वरी ने कुल 240 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक हासिल किया था। उन्होंने स्नैच में 110 और क्लीन एंड जर्क में 130 किलो वजन उठाकर यह उपलब्धि हासिल की थी।
यह उपलब्धि आज तक कोई भारतीय वेटलिफ्टर हासिल नहीं कर सका है। इसके अलावा मल्लेश्वरी ने 1994 और 1995 में विश्व खिताब भी अपने नाम किया था । उन्हें 1998 के बैंकॉक एशियाई खेलों में रजत हासिल हुआ था। उनके नाम 11 स्वर्ण सहित 29 अंतरराष्ट्रीय खिताब हैं।
19 सितंबर 2000 के इस दिन को छोड़ दिया जाए तो इस ओलंपिक मेंं भारत के हाथ सिर्फ निराशा ही हाथ लगी।

एथलेटिक्स- कुल 12 एथलेटिक्स का भारतीय दल सिडनी रवाना हुआ था। लेकिन ट्रैं रिकॉर्ड खराब ही रहा। पुरुष हो या महिला खिलाड़ी, 400 मीटर की रेस हो या फिर रिले रेस, सभी प्रारंभिक हीट के बाद बाहर हो गए।

यही हाल कमोबेश फील्ड इवेंट में रहा, शॉटपुट से लेकर जैवलिन और डिस्कस थ्रो में कोई भी भारतीय खिलाड़ी फाइनल में जगह बनाने में नाकाम रहा।

हॉकी-
पूल बी में भारत के सामने बहुत मजबूत टीमें थी। यह कहा जा रहा था कि भारत ग्रुप ऑफ डेथ में है। हालांकि भारत ने कोशिश काबिले तारीफ की और अर्जेंटीना और स्पेन जैसी टीमों को हराया और ऑस्ट्रेलिया और पोलेंड को बराबरी पर रोका। भारत को सिर्फ दक्षिण कोरिया से हार मिली। लेकिऩ इस प्रदर्शन से भारत सेमीफाइनल में नहीं जा पाया और सातवें स्थान पर रहा।

टेबल टेनिस और लॉन टेनिस-

लॉन टेनिस में लिएंडर पेस और महेश भूपति की जोड़ी से काफी उम्मीदें थी। लेकिन मीडिया में दोनों के बीच में दरार की खबरे उफान पर थी। संभवत इस कारण ही दोनों में तालमेल की कमी दिखी और यह जोड़ी सिर्फ दूसरे राउंड तक ही जा सकी।

टेबल टेनिस में भी भारतीय खिलाड़ियों ने निराश किया और पुरुष या महिला किसी भी वर्ग में भारत राउंड ऑफ 32 में भी नहीं पहुंच पाया।

बैडमिंटन- पुलेला गोपीचंद से भारत को काफी उम्मीदें थी। टूर्नामेंट के शुरुआत में मिले सौभाग्य को वह ज्यादा देर तक अपने साथ नहीं रख सके और क्वार्टरफाइनल से पहले ओलंपिक से बाहर हो गए। महिला खिलाड़ी अपर्णा पोपट पहले मैच के बाद ही ओलंपिक से बाहर हो गई। (वेबदुनिया डेस्क)



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