मैं अक्सर चाँद पर जाता हूँ
मैं अक्सर चाँद पर जाता हूँ शाइर आदमी हूँ
पलट कर फिर यहीं आता हूँ आख़िर आदमी हूँ।
पलट कर फिर यहीं आता हूँ आख़िर आदमी हूँ।

