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Written By समय ताम्रकर

प्रधानमंत्री बनाम वंदे मातरम्

प्रधानमंत्री
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भारत के इतिहास की बात की जाए तो 1947 के बाद के बाद की बातें अधूरी सी मिलती हैं। महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के बारे में भी मोटी-मोटी जानकारियां ही प्राप्त होती हैं। आजादी मिले 66 वर्ष हो गए हैं और इस दौरान 13 प्रधानमंत्री हुए हैं जिन्होंने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए, लेकिन इस बारे में जानकारियां ढूंढे नहीं मिलती। कई सवाल हैरान करते हैं कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? जवाब नहीं मिलते। ऐसे सवालों का समाधान करता है शेखर कपूर द्वारा प्रस्तुत टीवी शो ‘प्रधानमंत्री’। टीवी पर स्तरीय कार्यक्रम न होने की शिकायत को यह कार्यक्रम कुछ हद तक दूर करता है।

भारतीय इतिहास के बारे में यह शो ऐसी बातें पेश करता है जो इतिहास के विद्यार्थियों को भी पहली बार पता चलती है। काफी रिसर्च, मेहनत और होमवर्क कर यह शो तैयार किया गया है। प्रदेशों के बंटवारे, चीन से विवाद, कश्मीर मसला जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों को इसमें शामिल किया गया है और चौंकाने वाली जानकारियां बताई गई हैं।

शेखर कपूर जैसा संवेदनशील व्यक्ति का शो से जुड़ना ही बताता है कि शो स्तरीय होगा। एक फिल्ममेकर होने के अलावा शेखर अपने मौलिक चिंतन के लिए जाने जाते हैं और वे इस शो में नरेटर की भूमिका बखूबी निभा रहे हैं।

टीवी चैनलों की आपसी प्रतिद्वंद्विता जगजाहिर है। एक शो यदि सफल रहता है तो दूसरा चैनल भी उसी लाइन पर चलना शुरू कर देता है। पिछड़ने का खौफ इतना रहता है कि मकसद सिर्फ टक्कर देने का रह जाता है, भले ही तैयारी हो या न हो। सिर्फ उपस्थिति दर्ज कराने की चाहत रहती है।

‘प्रधानमंत्री’ की टक्कर में एक चैनल ने ‘वंदे मातरम्‍ : दास्तान ए जंग’ नामक शो के जरिये इतिहास खंगालने की कोशिश की है। इसमें अनसंग वॉर हीरोज़ की दास्तान है। शो की थीम उम्दा है, लेकिन इसका पहला एपिसोड दिखाता है कि बिना तैयारी के वे मैदान में उतर गए हैं। शेखर कपूर की टक्कर में कबीर बेदी को खड़ा किया गया है। मकसद सिर्फ इतना है कि हम भी कम नहीं है। प्रधानमंत्री इस शो से कहीं आगे खड़ा दिखाई देता है।

अच्छी बात यह है कि दिन भर उधार के फुटेज लेकर कॉमेडी शो, सास-बहू के धारावाहिक का पुन: प्रसारण और सनसनी के नाम पर बात का बतंगड़ बनाने वाले ये न्यूज चैनल अब तथ्यपरक शो लेकर आ रहे हैं। बदलाव की ये बहार सुखद है।

लेखक के बारे में
समय ताम्रकर
समय ताम्रकर फिल्म समीक्षक हैं, जो फिल्म, कलाकार, निर्देशक, बॉक्स ऑफिस और फिल्मों से जुड़े पहलुओं पर गहन विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं।.... और पढ़ें