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शिक्षक दिवस पर रोचक कविता : साइकिल हाथ में, छाते के साथ में

Updated: शुक्रवार, 31 अगस्त 2018 (17:01 IST)
गफूर स्नेही 
 
साइकिल हाथ में 
छाते के साथ में 
कपड़े की थैली है 
उजली मटमैली है 
कंधे पर बैग है 
वही मंथर वेग है 
खाना-पानी संग है 
उड़ा हुआ रंग है 
अफसर से तंग है 
नीति कर्म में जंग है 
गांव तो चाहता है 
विभाग न चाहता है 
बदली की धमकी है 
सरपंच की घुड़की है 
बच्चे कहते हैं 
रोक देंगे रस्ते हैं 
माएं दुआ देती 
बहुए घूंघट लेती 
निवृत्ति में बरस 
चार बाकी बस 
प्रमोशन न चाहते 
ऊंचाई न चाहते 
ये जमीन आन की 
वे हांके आसमान की 
शिक्षक आधी सदी 
नेकी एक न बदी। 

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