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Last Updated :वॉशिंगटन , गुरुवार, 25 सितम्बर 2025 (16:27 IST)

गोल्ड बताएगा शेयर बाजार का भविष्य, क्या करें निवेशक?

gold share market
Share market Vs Gold : 2025 के पहले 9 माह में सोने ने निवेशकों को निहाल कर दिया। अक्टूबर 2024 में जैसे ही शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा। निवेशकों ने शेयरों से पैसा निकालकर सोने में लगा दिया। पहली बार ऐसा नहीं हुआ। इससे पहले भी जब जब भी शेयर बाजार पर संकट आया निवेशकों की चाल सैफ हैवन मानी जानी वाली इस पीली धातु की ओर मुड़ गई। 

क्या है MCX पर सोने का हाल : वैश्विक स्तर पर सोने का वायदा भाव 3,768.50 डॉलर प्रति औंस है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में अक्टूबर आपूर्ति वाले अनुबंधों में सोने का भाव 1,12,430 रुपए प्रति 10 ग्राम हो है। वहीं दिसंबर में आपूर्ति वाले सोने के अनुबंधों की कीमत 1,13,500 प्रति 10 ग्राम है।
 
सोना और शेयर बाजार में निवेश कनेक्शन : वित्त विशेषज्ञ योगेश बागौरा ने कहा कि पिछले 2 सालों से गोल्ड लगातार बढ़ रहा है। इसके दामों में 65 से 70 प्रतिशत का उछाल है। जब भी बड़े प्लेयर्स को लगता है कि बाजार में कुछ होने वाला है तो वह अपना पैसा शेयर बाजार से निकाल के गोल्ड में लगा देते हैं।
 
उन्होंने कहा कि सन् 1998 से 2000 के बीच में गोल्ड करीबन 12 से 13 परसेंट बड़ा। उस समय शेयर बाजार में डॉट कॉम बबल का एक क्रेश आया था इससे बाजार 55 से 56% तक गिर गया था। इसके बाद वर्ष 2006 से 2008 तक गोल्ड 58% से 60 फीसदी बड़ा जबकि अमेरिका का लैहमेन ब्रदर्स बैंक डूबने से भारतीय शेयर बाजार में करीब 60% की गिरावट आई। उसके बाद सन 2018 से 2020 के बीच में जब गोल्ड 35 फीसदी बढ़ा तब बाजार में कोविड के कारण 38 से 40 परसेंट की गिरावट दिखाई दी।
 
रूस यूक्रेन युद्ध के पहले भी गोल्ड करीब 14 से 15% बड़ा और बाजार में 22 से 24 परसेंट का करेक्शन देखने को मिला। इससे पता चलता है कि जब-जब गोल्ड में कोई बड़ा करेक्शन आया है। शेयर बाजार में गिरावट आई है। लेकिन हर करेक्शन के बाद शेयर बाजार ने तेजी से वापसी की है। 
 
क्या करें निवेशक : उन्होंने कहा कि चाहे सोना हो या शेयर लोगों को पैसा सावधानी से निवेश करना चाहिए। बेहतर रिटर्न के लिए सही समय पर सही जगह पैसा लगाना जरूरी है।
 
डेट टू जीडीपी रेशो बढ़ा : 2024 में भारत की विकास दर 6.7 रही थी 2025 में यह 6.5 रहने का अनुमान है। 2026 में यह घटकर 6.2 रह सकती है। इसी तरह अमेरिका, चीन समेत अन्य देशों की जीडीपी भी सुस्त की संभावना है। यूरोपीय देश फ्रांस, जर्मनी और इटली का हाल भर बेहाल है। 
 
फिलहाल बाजार में डेट टू जीडीपी रेशो भी काम कर रहा है। कई देशों का डेट टू जीडीपी रेशो काफी बढ़ा हुआ है जो भी एक खतरनाक कारण हो सकता है। जापान का डेट टू जीडीपी रेशो 242% है तो सिंगापुर 173 है। अमेरिका का यह रेशो 123% है। इस वजह से कई देशों में रेट ऑफ इंटरेस्ट कम होगा। इससे बाजार में लिक्विडिटी आएगी और इस समय शेयर बाजार में लोगों की रुचि बढ़ेगी। यह समय निवेश का सही समय होगा।
अस्वीकरण : यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।
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