क्रिकेट के सामानों से शुरुआत की थी भारतीय महिला आइस हॉकी टीम ने

पुनः संशोधित शुक्रवार, 1 नवंबर 2019 (08:09 IST)
नई दिल्ली। की लद्दाख क्षेत्र से शुरू हुई यात्रा प्रेरणा से भरी रही है और इस टीम ने अपने सफर की शुरुआत क्रिकेट में इस्तेमाल किए जाने वालों सामानों से की थी।
खेल से जुड़े कपड़े बनाने वाली अंडर आर्मर कंपनी द्वारा गुरुवार को गुरुग्राम में आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान सेवांग चुस्कित ने टीम संघर्ष को लेकर कहा कि लद्दाख से लेकर यहां तक की कहानी एक बड़ी उपलब्धि है। यह कार्यक्रम दरअसल खिलाड़ियों के प्रदर्शन को निखारने के वैश्विक अभियान के तहत आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रबंध निदेशक और महिला आइस हॉकी संघ के अधिकारी भी मौजूद रहे।
कप्तान सेवांग ने बातचीत में कहा कि पूरी टीम की लद्दाख से लेकर यहां तक की यात्रा बेहद संघर्षभरी रही है और अभी भी टीम का संघर्ष जारी है। टीम के तौर पर हमने हर सीमा को चुनौती के तौर पर लिया। जब हमने शुरुआत की थी तो हमारे पास कोई आइस रिंक नहीं था तथा खेल के लिए जरूरी वस्तुओं का भी अभाव था लेकिन देश का प्रतिनिधित्व करने की भावना के सामने सब कुछ बौना था।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने क्रिकेट में इस्तेमाल किए जाने वालों सामानों से अपने खेल की शुरुआत की। शुरुआत में सभी खिलाड़ियों को उचित सामान नहीं मिलने से काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन बाद में धीरे-धीरे ही सही लेकिन इस स्थिति में बदलाव आया और लोग अब इस खेल को लेकर जागरूक हो रहे हैं।

टीम के अन्य खिलाड़ियों ने इस दौरान भारतीय खेल प्राधिकरण से महिला आइस हॉकी को मान्यता देने का अनुरोध किया। खिलाड़ियों ने कहा कि उनके खेल को मान्यता नहीं मिलने की वजह से उन्हें प्रायोजक नहीं मिल पाते हैं जिसका असर टीम के प्रदर्शन पर सीधे तौर पर पड़ता है। टीम की सभी जरूरतें फिलहाल भारतीय महिला आइस हॉकी संघ देखता है।
भारतीय महिला हॉकी टीम की शुरुआत वर्ष 2016 से हुई। टीम जन सहयोग की मदद से अपना पहला टूर्नामेंट खेलने गई लेकिन उन्हें उस दौरान करारी हार का सामना करना पड़ा। टीम को पहचान हालांकि वर्ष 2017 में उस दौरान मिली, जब वह ऑफ एशिया में चौथे स्थान पर रही।

खिलाड़ी अभी सरकार से रिंक और बुनियादी ढांचे बनाने की मांग कर रहे हैं जिससे कि वे टूर्नामेंटों में भाग लेने के लिए बेहतर तैयारी कर सकें। टीम का कहना है कि उत्तराखंड के देहरादून में एक बड़ा आइस रिंक मैदान है जिसे सरकार चाहे तो उसका पुनर्निर्माण कर सकती है।
गौरतलब है कि खिलाड़ियों के सामने सुविधाओं का अभाव है। लद्दाख में केवल 2 महीने बर्फ पड़ती है और टीम केवल इसी दौरान बर्फ के रिंक पर अभ्यास कर पाती है।



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