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दस स्वर्ण पदक विजेता महिला पहलवान मजदूरी करने को मजबूर

Updated: गुरुवार, 27 जून 2019 (22:12 IST)
जालंधर। राष्ट्रीय तथा राज्य स्तर पर 10 से अधिक स्वर्ण पदक जीतने वाली पंजाब के मोगा की 2 महिला पहलवान गरीबी के चलते अपना तथा अपने परिवार का पेट पालने के लिए धान के खेतों में मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं।
 
केंद्र तथा राज्य सरकारें नौजवानों को खेलों के लिए प्रेरित करने के लिए कईं प्रकार की योजनाओं का ऐलान करती हैं लेकिन इन्हें देखकर पता चलता है कि वास्तविकता इसके कितने विपरीत है।
 
जिला मोगा के कस्बा निहाल सिंहवाला और रणसिंह कलां से संबंधित ये दोनों महिला खिलाड़ी सरकार के रवैये से बेहद निराश हैं। ये लड़कियां वे रेसलर हैं जिन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर 10 स्वर्ण पदक जीते हैं और आज सरकार की अनदेखी के कारण मजदूरी करके अपनी खेल कला को आगे बढ़ाने के लिए यत्नशील हैं।
 
ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश के राज्यों की सरकारें भारत का नाम दुनियाभर में रोशन करने वालों की कितनी कद्र करती हैं? उल्लेखनीय है कि 28 जून को निहाल सिंहवाला में जिला कुश्ती संस्था मोगा की ओर से जूनियर पंजाब कुश्ती चैंपियनशिप का आयोजन करवाया जा रहा है।
 
पंजाब स्तर पर कुश्ती में 10 बार स्वर्ण पदक और राष्ट्रीय स्तर पर 5 बार कांस्य पदक जीत चुकीं अरशप्रीत कौर अपने परिवार के साथ खेतों में मजदूरी करने के लिए मजबूर है।

उसने बताया कि मैं हर रोज प्रेक्टिस करती हूं परंतु खुराक के लिए पैसे नहीं हैं। दो समय की रोटी के लिए मां-बाप खेतों में मजदूरी करते हैं। वे मुझे वाजिब खुराक नहीं दे सकते इसलिए मैं भी हर रोज खेतों में काम करती हूं और दिहाड़ी के पैसों के साथ खुराक खाती हूं। 

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