सनातन धर्म में इन तीन की उपासना वर्जित
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अंत में अयोग्य अर्थात वे सभी व्यक्ति- जो प्रत्यक्ष हैं, अयोग्य हैं। व्यक्ति पूजा निषेध है चाहे वह गुरु हो या पितृ या अन्य कोई।
वैसे तो हिन्दू धर्म में कण कण को ब्रह्म (ईश्वर) का स्वरूप माना जाता है। नदी, पहाड़, आकाश, गुरु, भगवान और देवता सभी प्रार्थनीय है, लेकिन इस तरह से धर्म और समूहगत विचार का बिखराव होता है। मनमानी पूजा और कर्मकांडों का विकास होता है अत: सिर्फ ब्रह्म ही सत्य है। वही प्रार्थनीय और वही वंदनीय है, जो अजन्मा, अप्रकट, अनित्य आदि, अंत और अनंत है।

