सनातन धर्म में इन तीन की उपासना वर्जित
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हिन्दू धर्म में ब्रह्म सर्वोपरि है अर्थात वह परमेश्वर अजन्मा और अप्रकट है। ब्रह्म ही सत्य है। ब्रह्म के बाद वे देवी और देवता जिनकी कोई मृत्यु नहीं है, वे सभी चेतनस्वरूप हैं। उन्हें मूर्ति बनाकर नहीं पूजते। जब मूर्ति बनाई जाती है तो उसमें प्राण-प्रतिष्ठा करके उसे चैतन्य किए जने का कार्य किया जाता है लेकिन कुछ विद्वान इसे उचित नहीं मानते।
अंत में अयोग्य अर्थात वे सभी व्यक्ति- जो प्रत्यक्ष हैं, अयोग्य हैं। व्यक्ति पूजा निषेध है चाहे वह गुरु हो या पितृ या अन्य कोई।
