महाबली राजा बलि के 10 रहस्य, जानिए...

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
राजा बलि : असुरों के राजा बलि या बाली की चर्चा पुराणों में बहुत होती है। वह अपार शक्तियों का स्वामी लेकिन धर्मात्मा था। दान-पुण्य करने में वह कभी पीछे नहीं रहता था। उसकी सबसे बड़ी खामी यह थी कि उसे अपनी शक्तियों पर घमंड था और वह खुद को ईश्वर के समकक्ष मानता था और वह देवताओं का घोर विरोधी था। भारतीय और में राजा बलि की कहानी सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।
ऐसा माना जाता है कि प्राचीनकाल में देवी और देवता हिमालय क्षेत्र में रहते थे। हिमालय में ही देवराज इंद्र का एक क्षेत्र था जिसमें नंदन कानन वन था। इंद्र के इस क्षेत्र के पास ही गंधर्वों का क्षेत्र था। यहीं पर कैलाश पर्वत पर भगवान शिव का निवास था। पहले धरती पर बर्फ की अधिकता थी और अधिकतर हिस्सा जलमग्न था। मानव गुफाओं में रहता था और सुर और असुर अपनी शक्तियों के बल पर संपूर्ण धरती पर विचरण करते थे। नागलोक का विस्तार दूर-दूर तक था और समुद्र में विचित्र-विचित्र किस्म के प्राणियों का जन्म हो चुका था।> > धनतेरस और ओणम पर्व राजा बालि की याद में मनाया जाता है।
प्रारंभिक जातियां- सुर और असुर कौन थे?
आप किसकी तरफ हैं : सुर या असुर?

प्राचीनकाल में सुर और असुरों का ही राज्य था। सुर को देवता और असुरों को दैत्य कहा जाता था। दानवों और राक्षसों की प्रजाति अलग होती थी। गंधर्व, यक्ष और किन्नर भी होते थे। असुरों के पुरोहित शुक्राचार्य भगवान शिव के भक्त और सुरों के पुरोहित बृहस्पति भगवान विष्णु के भक्त थे। इससे पहले भृगु और अंगिरा ऋषि असुर और देव के पुरोहित पद पर थे। सुर और असुरों में साम्राज्य, शक्ति, प्रतिष्ठा और सम्मान की लड़ाई चलती रहती थी।

दुनिया में दो ही तरह के धर्मों में प्राचीनकाल से झगड़ा होता आया है। एक वे लोग जो देवताओं के गुरु बृहस्पति के धर्म को मानते हैं और दूसरे वे लोग जो दैत्यों (असुरों) के गुरु शुक्राचार्य के धर्म को मानते आए हैं।

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