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Mahashivratri 2020 : शिव के गणों की माया

मंगलवार,फ़रवरी 18, 2020
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कौन है शिव के माता-पिता, पत्नि-पुत्र, भाई-बहन, सास-ससुर आदि। आओ जानते हैं संक्षिप्त में हमे शिव परिवार के बार में। इससे पहले यह जान लें कि भगवान शंकर को शिव भी कहा जाता जबकि शिव शब्द का उपयोग निराकार ईश्‍वर के लिए प्रयुक्त किया जाता है जिनकी शिवलिंग ...
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केसरी और अंजना के पुत्र हनुमानजी का पवनदेव ने भी पालन-पोषण किया था। उन्हें रुद्रावतार माना जाता है इसलिए उन्हें शंकरसुमन भी कहते हैं। हम बताने जा रहे हैं हनुमानजी के ऐसे 10 रहस्य जिसके बारे में आप शायद ही जानते होंगे। इनमें से कुछ रहस्यों की हम ...
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जैसे श्रीराम को पुरुषों में उत्तम पुरुषोत्तम कहा गया है, उसी तरह माता सीता भी महिलाओं में सबसे उत्तम हैं। माता सीता का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। आओ जानते हैं उनकी मृत्यु का रहस्य।
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भगवान राम को 14 वर्ष का जब वनवास हुआ तो वनवास के दौरान उन्होंने देश के सभी वन में रहने वाले लोगों को संगठित करने और शिक्षित करने का कार्य किया। भगवान राम की सेना में आदिवासी, भील, वानर, भालू, गिद्ध सभी थे। उल्लेखनीय है कि ओरांव आदिवासी से संबद्ध ...
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रविदासजी चर्मकार कुल से होने के कारण वे जूते बनाते थे। ऐसा करने में उन्हें बहुत खुशी मिलती थी और वे पूरी लगन तथा परिश्रम से अपना कार्य करते थे। आजो जानते हैं उनके बारे में 10 खास बातें।
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अंतरष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के आचार्य रामचरण महाराज की 301वीं जयंती मनाई जाएगी। रामचरण जी का जन्म माघ शुक्ला 14 शनिवार संवत् 1776 (1719 ई.) को राजस्थान के जयपुर जिले के मालपुरा नामक नगर के पास सोडा नामक ग्राम में हुआ था। जो उनका ननिहाल था। वे ...
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नवीन मत से विश्‍वकर्मा की जयंती इस बार 7 फरवरी 2020 को है। विश्वकर्मा एक महान ऋषि और ब्रह्मज्ञानी थे। ऋग्वेद में उनका उल्लेख मिलता है। कहते हैं कि उन्होंने ही देवताओं के घर, नगर, अस्त्र-शस्त्र आदि का निर्माण किया था। वे महान शिल्पकार थे। आओ जानते ...
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देवकी श्रीकृष्ण की सगी माता है। यह मथुरा के राजा कंस के पिता महाराजा उग्रसेन के भाई देवक की कन्या है। इनको अदिति का अवतार भी माना जाता है। इनका विवाह वसुदेव से हुआ। इसलिए श्रीकृष्ण के देवकीनंदन और वासुदेव भी कहते हैं।
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चंद्रवशी राजा पुरुरवा और स्वर्ग की अप्सरा उर्वशी की प्रेम कथा प्रचलित है। बाद में दोनों ने विवाह किया और पुरुवंश की स्थापना हुई। पुरुवंश में ही आगे चलकर राजा कुरु हुए और कुरु से ही आगे चलकर धृतराष्ट्र और पांडु हुए। इंद्र के कहने पर अप्सरा उर्वशी कई ...
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करीब 58 दिनों तक मृत्यु शैया पर लेटे रहने के बाद जब सूर्य उत्तरायण हो गया तब माघ माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को भीष्म पितामह ने अपने शरीर को छोड़ा था, इसीलिए यह दिन उनका निर्वाण दिवस है। आओ जानते हैं भीष्म पितामह वो कौनसी 5 गलतियां थी जिसके ...
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हनुमानजी, नारदमुनी और सनतकुमार ही ऐसे देवता थे जो अपनी शक्ति से आकाशमार्ग में विचरण करते थे। जबकि अन्न देवी या देवताओं के वाहन होते थे। हालांकि ऐसे भी कई ऋषि और मुनि थे जो अपनी ही शक्ति से आकाशमार्ग से आया-जाया करते थे। हनुमान सर्वशक्तिमान और ...
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त्रिदेवियों में से एक माता सरस्वती की पूजा देश में कम ही होती है। उनके मंदिर भी बहुत कम ही पाए जाते हैं। वसंत पंचमी को ही उनकी विशेष रूप से पूजा और अर्चना होती है। कार्यस्थलों पर उनकी मूर्ति को देखा जा सकता है। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, ...
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माता पार्वती का एक अवतार है देवी भ्रामरी। भ्रामरी को मधुमक्खियों की देवी के रूप में जाना जाता है। देवी महात्म्य में उनका उल्लेख मिलता है। देवी भागवत पुराण में संपूर्ण ब्रह्मांड के जीवों के लिए उसकी महानता दिखाई गई और उनकी सर्वोच्च शक्तियों का वर्णन ...
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मय दानव को मयासुर भी कहते हैं। यह बहुत ही शक्तिशाली और मायावी शक्तियों से संपन्न था। कहते हैं कि यह आज भी जीवित है। मय दावन के संबंध में 10 ऐसी रोचक बातें जिन्हें जानकर आप दंग रह जाएंगे।
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18 सिद्धों में से एक बोगर एक तमिल सिद्धार थे जो 550 से 300 ईसा पूर्व के बीच हुए थे। बोगर ने एक किताब 'बोगर 7000' लिखी है। बोगर 7000 में 7000 गाने हैं, और इसमें सिद्ध चिकित्सा के बारे में विवरण है।
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करीब 58 दिनों तक मृत्यु शैया पर लेटे रहने के बाद जब सूर्य उत्तरायण हो गया तब माघ माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को भीष्म पितामह ने अपने शरीर को छोड़ा था, इसीलिए यह दिन उनका निर्वाण दिवस है। आओ जानते हैं भीष्म पितामह के बारे में 10 रोचक तथ्य।
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शुक्राचार्य का नाम तो सभी ने सुना होगा। वे दैत्य अर्थात असुरों के गुरु थे। उनकी ख्‍याति दूर-दूर तक फैली थी। आओ जानते हैं उनके बारे में 10 रोचक जानकारी।
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रामानंद अर्थात रामानंदाचार्य वैष्णव भक्तिधारा के महान संत हैं। उन्होंने उत्तर भारत में वैष्णव सम्प्रदाय को पुनर्गठित किया तथा वैष्णव साधुओं को उनका आत्मसम्मान दिलाया।
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अंडाल एक महिला महान अलवर संत एवं कवि है। वह 12 अलवर संतों में से एक मात्र महिला संत है। जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भगवान विष्णु की भक्ति के लिए समर्पित कर दिया था। माना जाता है कि उनका जन्म 7 वीं शताब्दी ईस्वी के दौरान श्रीविल्लिपुथुर में हुआ था।
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