भारत के 10 शानदार ऐतिहासिक किले

अनिरुद्ध जोशी| Last Updated: गुरुवार, 21 फ़रवरी 2019 (12:55 IST)
सोनार किला : राजस्थान में पहाड़ी दुर्ग, जल दुर्ग, वन दुर्ग और रेगिस्तानी दुर्ग के बेमिसाल उदाहरण देखने को मिलते हैं। जैसलमेर के किले को 'रेगिस्तानी दुर्ग' कहते हैं। रेगिस्तान के बीचोबीच स्थित यह दुनिया के सबसे बड़े किलों में से एक है। इसे रावल जैसवाल ने 1156 ईस्वी में बनवाया था। जैसलमेर किले को 'सोनार किले' के नाम से भी जाना जाता है।
सुबह सूर्य की अरुण चमकीली किरणें जब इस दुर्ग पर पड़ती हैं तो बालू मिट्टी के रंग-परावर्तन से यह किला पीले रंग से दमक उठता है। सोने-सी आभा देने के कारण इसे 'सोनार किला' या 'गोल्डन फोर्ट' भी कहा जाता है। इस दुर्ग की विशालता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस दुर्ग के चारों ओर 99 गढ़ बने हुए हैं। इनमें से 92 गढ़ों का निर्माण 1633 से 1647 के बीच हुआ था।> > यह किला शहर से 76 किमी दूर त्रिकुटा पहाड़ी पर त्रिकोण आकार में बनाया गया है। किले में सबसे ज्यादा आकर्षक जैन मंदिर, रॉयल पैलेस और बड़े दरवाजे हैं। जैसलमेर रेगिस्तान का शहर है, जो त्रिकुटा पहाड़ी, हवेलियों और झीलों के लिए प्रसिद्ध है।
यही वह दुर्ग है जिसने 11वीं सदी से 18वीं सदी तक अनेकानेक उतार-चढ़ाव देखते गौरी, खिलजी, फिरोजशाह तुगलक और ऐसे ही दूसरे मुगलों के भीषण हमलों को लगातार झेला है। कभी सिंधु, मिस्र, इराक, कांधार और मुलतान आदि देशों का व्यापारिक कारवां देश के अन्य भागों को यहीं से जाता था। कहते हैं कि 1661 से 1708 ई. के बीच यह दुर्ग नगर समृद्धि के चरम शिखर पर पहुंच गया। व्यापारियों ने यहां स्थापत्य कला में बेजोड़ हवेलियों का निर्माण कराया तो हिन्दू, जैन धर्म के मंदिरों की आस्था का भी यह प्रमुख केंद्र बना।

कहा जाता है कि महाभारत काल में जब युद्ध समाप्त हो गया और भगवान कृष्ण ने अर्जुन को साथ लेकर द्वारिका की ओर प्रस्थान किया, तब इसी नगर से कभी उनका रथ गुजरा था। रेगिस्तान के बीचोबीच यहां की त्रिकुट पहाड़ी पर कभी महर्षि उत्तुंग ने तपस्या की थी।

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