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पारिजात के पौधे का महत्व और चमत्कार

बुधवार,अगस्त 5, 2020
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हिन्दू धर्म में सफेद, लाल, नारंगी, पीला, केसरिया और भगवान रंग का बहुत महत्व है। गेरू और भगवा रंग एक ही है, लेकिन केसरिया में मामूली-सा अंतर है। हम गेरूआ, भगवा और केसरिया रंग को एक ही मानकर चलते हैं तो आओ जानते हैं केसरिया या भगवा रंग के 10 रहस्य।
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भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म धारण करते हैं। यह भस्म कई प्रकार से बनती है, लेकिन कहते हैं कि खासकर मुर्दे की भस्म ही महाकाल में चढ़ाई जाती है। हालांकि वर्तमान में मुर्दे की भस्म का उपयोग नहीं होता है। आओ जानते हैं शिव की भस्म और भस्मारती के रहस्य।
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विद्या और कला में अंतर होता है। विद्या दो प्रकार की होती है अपरा और अपरा विद्या। इसी के अंतर्गत कई प्रकार की विद्याएं होती हैं। इसी तरह कलाएं भी दो प्रकार की होती है। पहली सांसारिक कलाएं और दूसरी आध्यात्मिक कलाएं। आओ जानते हैं इसके बारे में ...
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भगवान शिव दुनिया के सभी धर्मों का मूल हैं। शिव के दर्शन और जीवन की कहानी दुनिया के हर धर्म और उनके ग्रंथों में अलग-अलग रूपों में विद्यमान है। भगवान शिव के अनमोल वचनों को 'आगम ग्रंथों' में संग्रहीत किया गया है। आगम का अर्थ ज्ञान अर्जन। पारंपरिक रूप ...
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वैजयंती के वृक्ष पर बहुत ही सुंदर फूल उगते हैं। इसके फूल बहुत ही सुगंधित और सुंदर होते हैं। इसके बीजों की माला बनाई जाती है। वैजयंती के फूल भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को बहुत ही प्रिय है। आओ जानते हैं इसके 6 लाभ।
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कहते हैं कि भगवान जगन्नाथ का प्रसाद ‍दुनिया के सभी मंदिरों के प्रसाद से भिन्न और चमत्कारिक है। इस मंदिर के प्रसाद को अनोखे तरीके से बनाया जाता है और इस संबंध में एक कथा भी प्रचलित है। आओ जानते हैं जगन्नाथ के प्रसाद के बारे में खास बातें।
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भगवान शिव के भक्तों में सभी वर्ग के लोग हैं। दैत्य, दानव, राक्षस आदि सभी लोग भगवान शिव की ही आराधना करते रहे हैं। रावण में राक्षस समाज की प्रवृत्तियां थीं और वह राक्षस समाज के लिए ही कार्य करता था। सभी राक्षस जातियां शिव की ही भक्त थीं। आओ जानते हैं ...
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रामायण में उल्लेख मिलता है कि जब राम-रावण युद्ध में मेघनाथ आदि के भयंकर अस्त्र प्रयोग से समूची राम सेना मरणासन्न हो गई थी, तब हनुमानजी ने जामवंत के कहने पर वैद्यराज सुषेण को बुलाया और फिर सुषेण ने कहा कि आप द्रोणगिरि पर्वत पर जाकर 4 वनस्पतियां लाएं ...
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सिर ढंकने की परंपरा हिन्दू धर्म की देन है। प्राचीन काल में राजा लोग मुकुट पहननते थे। प्राचीनकाल में सभी के सिर ढंके ही होते थे अर्थात हर प्रांत की अपनी एक वेशभूषा थी जिसमें सिर पर पगड़ी पहनने का रिवाज था। राजस्थान, मालवा व निमाड़ के ग्रामीण ...
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हिंदू इतिहास ग्रंथ पुराणों में त्रैलोक्य का वर्णन मिलता है। ये तीन लोक हैं- 1. कृतक त्रैलोक्य, 2. महर्लोक, 3. अकृतक त्रैलोक्य। इसमें से कृतक त्रैलोक्य में स्थित है पाताल लोक। आओ जानते हैं पाताल लोक के 8 रहस्य।
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प्रत्येक व्यक्ति जीवन में अपार धन कमाना चाहता है लेकिन लाख प्रयास के बाद भी वह सफल नहीं हो पाता है तो यह जानना जरूरी है कि उसकी असफलता का कारण क्या है। असफलता के दो कारण होते हैं पहला आपका अधूरा कर्म या दूसरा आपके भाग्य का साथ न देना। लेकिन वास्तु ...
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सोशल मीडिया और इंटरनेट पर संत सूरदास के नाम पर एक भविष्यवाणी वायरल की जा रही है। इस भविष्यवाणी को आज के संदर्भ से जोड़कर कुछ लोग इसे वायरल कर रहे हैं। हालांकि इस भविष्यवाणी की सत्यता की पुष्टि करना मुश्‍किल है।
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दुनिया चांद पर चली गई है। मतलब कि दुनिया के कुछ देशों ने चांद पर अपने मानव रहित यान उतार दिए हैं। भारत ने भी चंद्रयान 2 मिशन के माध्यम से चंद्रमा पर विक्रम रोवर उतार दिया है। अब सवाल यह उठता है कि कौन रहता है चांद पर? हिन्दू धर्म इस संबंध में क्या ...
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यदि जिंदगी बदलना है तो पढ़ें हिन्दू धर्म के ये 10 तरह के ज्ञान। सुख, संपत्ति, समृद्धि, निरोगी काया और सभी तरह की शांति मिलेगी।
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भगवान श्रीकृष्ण का रूप अनोखा है। करुपदेश का राजा पौंड्रक भी श्रीकृष्ण जैसे ही रूप रखकर खुद को वह विष्णु का अवतार मानता था। आओ जानते हैं श्रीकृष्ण के शुभ प्रतीकों के बारे में।
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हिन्दू धर्मानुसार मरने के बाद आत्मा की मुख्यतौर पर तीन तरह की गतियां होती हैं- 1.उर्ध्व गति, 2.स्थिर गति और 3.अधोगति। इसे ही अगति और गति में विभाजित किया गया है।
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हिन्दू धर्म में ओम एक 'विशेष ध्वनि' का शब्द है। तपस्वी और ध्यानियों ने जब ध्यान की गहरी अवस्था में सुना की कोई एक ऐसी ध्वनि है जो लगातार सुनाई देती रहती है शरीर के भीतर भी और बाहर भी। हर कहीं, वही ध्वनि निरंतर जारी है और उसे सुनते रहने से मन और ...
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शिव पुराण का संबंध भगवान शिव और उनके अवतारों से हैं। इसमें शिव भक्ति, शिव महिमा और शिवजी के संपूर्ण जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला गया है। साथ ही इसमें ज्ञान, मोक्ष, व्रत, तप, जप आदि के फल की महिमा का वर्णन भी मिलता है। हालांकि शिव पुराण में हजारों ...
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पुराणों के बारे में बहुत भ्रम फैला हुआ है और इसका कुछ लोग विरोध भी करते हैं। दरअसल अंग्रेजी के मिथ शब्द के कारण बहुत भ्रांतियां फैली और इसी शब्द के कारण पुराणों को अप्रमाणिक मान लिए जाने का प्रचलन चला। संपूर्ण पुराणों के पढ़े और उन्हें समझे बगैर उस ...
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