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माता सीता और द्रौपदी में थीं ये आश्चर्यजनक 5 समानताएं

रविवार,मई 9, 2021
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कोरोना वायरस सचमुच घातक है, लेकिन इससे संक्रमित लोग ठीक भी हो गए हैं। यदि आपने लोगों से मिलना-जुलना और भीड़ वाले क्षेत्र में जाना छोड़ दिया है तो सबसे बड़ा बचाव यही है। इसके अलावा भारतीय संस्कृति मैं बताई गई जीवन शैली को अपनाकर आप कोरोना संक्रमण से ...
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बजरंगबली हनुमानजी को इन्द्र से इच्छामृत्यु का वरदान मिला। श्रीराम के वरदान अनुसार कल्प का अंत होने पर उन्हें उनके सायुज्य की प्राप्ति होगी। सीता माता के वरदान के अनुसार वे चिरंजीवी रहेंगे। राम दरबार में श्रीराम और सीता सिंहासन पर विराजित हैं और उनके ...
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प्राचीनकाल से ही लोग खाना खाने के बाद मीठा जरूर खाते हैं। हिन्दू शास्त्र और आयुर्वेद में भी इसका उल्लेख मिलता है। मीठा खाने के संबंध में तो आपको पता ही होगा लेकिन बहुत कम लोग नहीं जानते होंगे कि खाने के पहले तीखा या कहें कि चरका क्यों खाते हैं। आओ ...
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हिन्दू धर्म में समय की बहुत ही व्यापक धारणा है। क्षण के हजारवें हिस्से से भी कम से शुरू होने वाली कालगणना ब्रह्मा के 100 वर्ष पर भी समाप्त नहीं होती। हिन्दू मानते हैं कि समय सीधा ही चलता है। सीधे चलने वाले समय में जीवन और घटनाओं का चक्र चलता रहता ...
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प्राचीनकाल में वेदों का अध्‍ययन होता था। उसमें भी शिक्षा, छंद, व्याकरण, निरुक्त, ज्योतिष और कल्प। ये छह वेदांग होते हैं और जिसकी जिसमें रुचि होती थी वह उसका पठन करता था। इसमें भी ज्योतिष को वेदों का नेत्र माना गया है। ज्योतिष में ही पंचांग विद्या को ...
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हमारी धरती पर हाथी सबसे संवेदनशील प्राणी है। यह मनुष्य से ज्यादा समझदार और बुद्धिमान माना गया है। इससे भी ज्यादा संवेदनशील और बुद्धिमान जलचर प्राणी डॉल्फिन को माना जाता है। आजो जानते हैं हाथी के बारे में 10 रहस्य।
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भाद्रपद की शुक्ल चतुर्थी के दिन भगवान गणेशजी का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन गणपति की स्थापना करके गणेशोत्सव मनाया जाता है। प्रत्येक माह के कृष्‍ण पक्ष की चतुर्थी संकष्टी और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी विनायक चतुर्थी कहलाती है। अमावस्या के बाद वाली चतुर्थी ...
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माता कालिका के अनेक रूप हैं जिनमें से प्रमुख है- 1.दक्षिणा काली, 2.शमशान काली, 3.मातृ काली और 4.महाकाली। इसके अलावा श्यामा काली, गुह्य काली, अष्ट काली और भद्रकाली आदि अनेक रूप भी है। सभी रूपों की अलग अलग पूजा और उपासना पद्धतियां हैं। आओ जानते हैं ...
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ब्रह्मा हिन्दू धर्म में एक प्रमुख देवता हैं। ये हिन्दुओं के तीन प्रमुख देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) में से एक हैं। ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता कहा जाता है। सृष्टि रचियता से मतलब सिर्फ जीवों की सृष्टि से है।
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तांडव शब्द भगवान शिव से जुड़ा हुआ है। ताण्डव का अर्थ होता है उग्र तथा औद्धत्यपूर्ण क्रिया कलाप या स्वच्छंद क्रिया कलाप। ताण्डव (अथवा ताण्डव नृत्य) शंकर भगवान द्वारा किया जाने वाला अलौकिक नृत्य है।
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अयोनिजा का अर्थ होता है वह व्यक्ति जिसका जन्म किसी गर्भ से नहीं हुआ हो। अर्थात गर्भ से बाहर किसी विशेष परिस्थिति में हुआ हो। रामायण, महाभारत और अन्य हिन्दू शास्त्रों में हमें ऐसी ऐसी जन्मकथाएं पढ़ने को मिलती हैं जिन पर सहज ही विश्वास करना थोड़ा ...
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ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश को ही सर्वोत्तम और स्वयंभू मान जाता है। क्या ब्रह्मा, विष्णु और महेश का कोई पिता नहीं है? वेदों में लिखा है कि जो जन्मा या प्रकट है वह ईश्‍वर नहीं हो सकता। ईश्‍वर अजन्मा, अप्रकट और निराकार है।
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नवरात्रि में खासकर माता कात्यायिनी की पूजा होती है। छठ पर्व के दौरान भी माता कात्यायिनी की पूजा का विधान है। कात्यायिनी को माता दुर्गा का एक रूप माना जाता है। आओ जानते हैं माता कात्यायिनी के बारे में 7 खास बातें।
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अतिथि को मेहमान समझा जाता है। ऐसा मेहमान या आगुंतक जो बगैर किसी सूचना के आए उसे अतिथि कहते हैं। हालांकि जो सूचना देकर आए वह भी स्वागत योग्य है। अतिथि का शाब्दिक अर्थ परिव्राजक, सन्यासी, भिक्षु, मुनि, साधु, संत और साधक से भी है। तिथि देवो भव: अर्थात ...
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त्रिपुर भैरवी की उपासना से सभी बंधन दूर हो जाते हैं। यह बंदीछोड़ माता है। भैरवी के नाना प्रकार के भेद बताए गए हैं जो इस प्रकार हैं त्रिपुरा भैरवी, चैतन्य भैरवी, सिद्ध भैरवी, भुवनेश्वर भैरवी, संपदाप्रद भैरवी, कमलेश्वरी भैरवी, कौलेश्वर भैरवी, ...
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देशभर में जो ज्योर्तिलिंग है वे सभी स्वंभू है परंतु पत्थर के शिवलिंग के अलावा शिवलिंग कई प्रकार और पदार्थ या धातु से बनाए जाते हैं। शिवपुराण अनुसार भगवान विष्णु ने पूरे जगत के सुख और कामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान विश्वकर्मा को अलग-अलग तरह के ...
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भगवान श्रीकृष्ण का रूप अनोखा है। करुपदेश का राजा पौंड्रक भी श्रीकृष्ण जैसे ही रूप रखकर खुद को वह विष्णु का अवतार मानता था। आओ जानते हैं श्रीकृष्ण के शुभ प्रतीकों के बारे में।
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रंगों का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। वैज्ञानिकों के अनुसार रंग तो मूलत: पांच ही होते हैं- कला, सफेद, लाल, नीला और पीला। काले और सफेद को रंग मानना हमारी मजबूरी है जबकि यह कोई रंग नहीं है। इस तरह तीन ही प्रमुख रंग बच जाते हैं- लाल, पीला और नीला। ...
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भारत में शैव, नागा या नाथपंथी साधु धूनी रमाते और भस्म धारण करते हैं। आदिदेव शिव के समय से ही परंपरा से भस्म धारण करने का प्रचलन रहा है। भस्म को नागा साधुओं का वस्त्र माना जाता है। भस्म कई प्रकार की होती है। खाने की भस्म को विभूति या भभूत कहा जाता
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