Hanuman Chalisa

प्रेम-कविता : सजा रही हूं फिर से

Updated: रविवार, 3 मई 2015 (14:09 IST)
फाल्गुनी   
साथ की सुंदर यात्रा के तीन बरस होने को है  
और मैं अपनी मन-मंजूषा में रखे 
तुम्हारे दिए हर शब्द-मोती, मनके और सितारे देख रही हूं  
 
बीती स्मृतियों की माला पिरो रही हूं..  
 
कुछ 'मनके' चुन रही हूं, बिन रही हूं, गिन रही हूं 
हाथों में लिए सोच रही हूं... 

सुंदर है वह मोती, सितारे और कुंदन-जरी  
जो रखती गई मैं इस मंजूषा में,  
 
यह हैं वह नन्हे रंगीन सितारे  
जिन्हें अरमानों की चूनर पर 
टांका था मैंने 
जब मेरे कानों में 
तुमने अपनी 'हां' की  
शहद-बूंद गिराई थी. ..  
 
सुहाग की लाल चूडियों के साथ
मेरे सपनों में खनखनाए थे यह स्वच्छ मोती  
जब तुम्हारी आंखों में झांका था मेरा स्वीकार,  
 
मेरी नींदों में लजाई-खिलखिलाई थी 
रेशमी प्यार की कुंदन-जरी
जब तुम्हारे गर्म हाथों में सकुचाया मेरा नर्म हाथ था 
जीवन की सबसे मंगल, सरल और मधुर यात्रा के लिए... 
 
पर इनमें कुछ मनके ऐसे हैं जो हमारे 'मन' के नहीं हैं 
इन्हें अपनी मन-मंजूषा से हटाते हुए 
सजा रही हूं फिर से 
कुछ मोती, कुछ मनके, कुछ सितारे, कुछ कुंदन, कुछ जरी 
दो मुझे बस इतना सा जगमगाता विश्वास 
... कि इस बार हर मोती में स्नेह ज्योति हो 
... कि इस बार हर सितारे में स्वीकार हो 
कि इस बार संजोया हर 'मनका' हमारे मन' का हो... 
 
लेखक के बारे में
स्मृति आदित्य
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंच पर बढ़ायी भारत की प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

नया भारत, नई उड़ान: मोदी युग में आत्मविश्वास का नया शिखर

17 सितंबर जन्मदिन पर विशेष: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में 25 दिलचस्प बातें

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?