मेरा देश मेरा अभिमान
कभी न बिखरे देश हमारा
मेरा देश मेरा अभिमाननहीं है ये ज़मीन का टुकड़ाये है मेरी आत्मा, मेरी जान ये है मेरा वतन, मेरी आन।माँ की तरह इसने पाला पिता की तरह मुझे दुलारा इसकी माटी में खेल मैंने अपना बचपन गुजारा।माटी इसकी इतनी प्यारीस्वर्ग से सुंदर धरा हमारीइसके जल को शीश लगाते भारत नहीं, 'भारत माँ' कह बुलाते। मेरा देश कभी नहीं बँटा जातिवाद के नारों में एक थे हम, एक है हमएकता की सुगंध है इन फिजाओं में।मेरा ये प्यारा हिंदोस्ता शांति, अमन का ये जहां कभी न बिखरे देश हमारा विजयी रहे तिरंगा प्यारा।
लेखक के बारे में
गायत्री शर्मा