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उड़ता गुजरात थर्राता थार

मंगलवार,जनवरी 27, 2009
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भारत की सीमाओं के अंदर कहीं दूसरा देश बसता है, तो वह है पूर्वोत्तर। चीन की संस्कृति से प्रभावित लेकिन रहन-सहन भारतीयता से परिपूर्ण और बदला-बदला सा खानपान इस बात का अहसास कराता है।
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दक्षिण में विकास की होड़

मंगलवार,जनवरी 27, 2009
दक्षिण में आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक व केरल विकास की नई इबारत लिख रहे हैं। लंबी तटरेखा और आसान आवागमन के साधन होने से अन्य प्रदेशों के लोग इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में रहते हैं। यही कारण है कि बेंगलुरू में छः भाषाओं की फिल्में प्रदर्शित होती ...
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आजादी के बाद भारत ने छः दशक बिता दिए। खान-पान बदला, रहन-सहन बदल गया। फिजा बदली तो फसाने, रुत बदली तो रूतबा और पानी भी बदला तो परंपराएँ भी बदल गईं। नहीं बदला तो देश का आम आदमी, उसकी मजबूरी और भुखमरी। विकास का पहिया घूमा तो दक्षिण आगे निकल गया और ...
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गणतंत्र की जयकार कश्मीर से नगालैंड तक गूँज रही है। भारत के साथ राजनीतिक क्रांतियाँ करने वाले कई देशों में पिछले छः दशकों के दौरान पूरी व्यवस्था बदल गई। संविधान बदल गए। विचारधाराएँ बदल गईं। राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों के तख्तापलट हिंसक क्रांति ...
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'देश की कानून व्यवस्था अलग विषय है और देश की आतंरिक सुरक्षा अलग। आज देश का कानून देश की सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं है। आईपीसी, सीआरपीसी देश में हमले करने वाले आतंकियों को पकड़ने में मददगार नहीं हो सकते हैं। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर एनडीए ...
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सैकड़ो बरस की गुलामी के बाद 26 जनवरी 1950 में भारत में गणतंत्र का पौधा रोपा गया। गणतंत्र के इस पौधे को हजारो बलिदानों और आहुतियों से सींचा गया।
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26 जनवरी 2009 को भारत अपने गणतंत्र के 59 वर्ष पूर्ण करेगा। बीते वर्षों में देश ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं, विकास की सीढ़ियाँ चढ़ी हैं, तो पुरानी मान्यताएँ भी बदली हैं। इसमें गोचर के ग्रहों का भी बड़ा योगदान रहा है। भार‍‍त की जन्मकुंडली वृषभ लग्न ...
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भारत के प्रथम राष्‍ट्रपति डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद ने 26 जनवरी 1950 को 21 तोपों की सलामी के बाद भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज को फहराकर 59 वर्ष पहले भारतीय गणतंत्र के ऐतिहासिक जन्‍म की घो‍षणा की थी। अंग्रेजों के शासनकाल से छुटकारा पाने के आठ सौ चौरान्यवें ...
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गणतंत्र दिवस पर प्रत्येक वर्ष की तरह 26.1.2009 को दिल्ली में भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल राष्ट्रीय ध्वज फहराएँगी एवं तीनों सेनाओं की सलामी का गौरव हासिल कर भारत की सभी महिलाओं का मान बढ़ाएँगी। जहाँ गुरु चन्द्र गजकेसरी योग बना रहे ...
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आज देश उन बहादुर बच्चों को सलाम करता है तथा उनकी बहादुरी की सहारना करता है, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर सच्ची मानवता का फर्ज निभाया। इन बच्चों को प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस पर सम्मानित किया जाता है। सन् 1957 से यह पुरस्कार देश के वीर नौनिहालों ...
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मेरा देश कभी नहीं बँटा जातिवाद के नारों में एक थे हम, एक है हम एकता की सुगंध है इन फिजाओं में। मेरा ये प्यारा हिंदोस्ता शांति, अमन का ये जहाँ कभी न बिखरे देश हमारा विजयी रहे तिरंगा प्यारा।
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जीत के संग सम्मान दिलाए

शुक्रवार,जनवरी 23, 2009
शीतल, धवल, ये निश्छल मन, करने चले नमन, लहराने तिरंगा ले के ख्वाहिश सब ओर हो अमन । चाहत और वफादारी का पैगाम, देता सरहद पे, बैठा सिपाही निभाने को वादा, देश में हो अमन ।
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आज हम अपना 60 वाँ गणतंत्र दिवस मना रहे हैं अर्थात अब हमारी आजादी बूढी होती जा रही है व हम अनुभवों से परिपक्व होते जा रहे हैं। इन 60 सालों में जहाँ हमारे देश ने आतंकवाद, सुनामी, भूकंप व बाढ़ का रूप में भयानक त्रासदी को सहा है।
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भारतीय गणतंत्र आज परिपक्व हो गया है। 60 वाँ दिवस मनाते हुए सहज ही गौरवमयी स्मृतियों को नमन करने को दिल करता है। पिछले वर्षों में विश्व-पटल पर भारत की छवि उजली होकर उभरी है। साल दर साल प्रगति ने भारत की बाँह थामे रखी है।
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आज 60वाँ गणतंत्र है। इन साठ वर्षों में भारत ने नित नए प्रगति के सोपान तय किए हैं। किन्तु हम संतोष की साँस ले सके या गौरव के परचम लहरा सके ऐसे क्षण अँगुलियों पर गिने जाने योग्य ही निर्मित हुए है यह भी एक उतना ही कठोर सच है।
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26 जनवरी। हमारा राष्ट्रीय पर्व। एक अत्यंत शुभ दिन। वह दिन जब हमने अपना संविधान लागू किया था। जनता का, जनता के लिए, जनता द्वारा शासन को सर्व सम्मति से स्वीकार किया था। इस दिन की शुभता पर भला कैसे प्रश्न चिन्ह खड़े किए जा सकते हैं? फिर भी पता नहीं ...
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