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सबसे पुरानी वैदिक पाठशाला

सिरपुर में मिले अवशेष

पुरानी वैदिक पाठशाला
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रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन पुरातत्व विभाग के तत्वावधान में सिरपुर में चल रहे उत्खनन कार्य में विश्व की सबसे पुरानी वैदिक पाठशाला के अवशेष मिले हैं। सिरपुर में पाँच वर्षों से चल रहे उत्खनन कार्य में वैदिक पाठशाला को विभाग के प्रमुख सलाहकार अरुणकुमार शर्मा के निर्देशन में खोजा गया है।

सातवाहन काल (2 सदी पूर्व) व सरभपुरिया काल(5वीं से 7वीं शताब्दी) में हुए निर्माण के अवशेषों पर 'नईदुनिया' से विशेष बातचीत की। शर्मा ने उत्खनन में मिले अवशेषों पर विस्तार से चर्चा की।

मिला स्नान कुंड : शर्मा ने बताया कि सिरपुर में उन्होंने नगर संरचना के उत्खनन में एक सार्वजनिक मकान खोजा है,जिसमें बरामदे ही बरामदे हैं। इसके अलावा यहाँ सफेद पत्थरों से निर्मित कुंड निकला है। 3.6 मीटर लंब व चौड़े कुंड की गहराई 70 सेंटीमीटर है।

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कुंड के चारों तरफ 12 स्तम्भ भी थे।इनके अवशेष के रूप में आधार स्तम्भ शेष बचे हैं। कुंड के उत्तर पूर्व में तुलसी चौरा है। इसमें जल की निकासी के लिए एक भूमिगत नाली से जोड़कर कुंड से मिलाया गया है। कुंड के दक्षिण-पश्चिम कोने पर भी भूमिगत नाली से जल निकासी के काम करने के प्रमाण यहाँ पर मिले हैं। यह कुंड संभवतः आयुर्वेदिक स्नान के लिए प्रयुक्त होता था। कुंड में नीम की पत्तियाँ डालने का अनुमान हो सकता है। यहाँ पर संभवतः तेल स्नान पद्धति का भी उपयोग किया जाता रहा होगा।

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वैदिक पाठशाला : एक किलोमीटर की परिधि में फैले दूसरी शताब्दी के अवशेषों के अंतर्गत अशोक का स्तूप भी मिला है। यहाँ पर सात धान्य भंडार भी मिले हैं। इसमें तुलसी पत्ती और नीम पत्ती व गेरू के टुकड़े रखकर दीमक से सुरक्षा करने के प्रमाण मिले हैं।

5वीं शताब्दी में बनाई गई वैदिक पाठशाला के प्रमाण भी यहाँ देखे जा सकते हैं। 10 मीटर लंबाई व 1.5 मीटर चौड़ाई के कमरों के बीचोंबीच में विष्णु की मूर्ति मिली है।

इस कमरे में 60 विद्यार्थियों के पढ़ने की व्यवस्था थी। शर्मा ने यह भारत में खोजी गई सबसे प्राचीन पाठशाला है। यहाँ पर शिक्षकों के कमरें भी मिले हैं। वैदिक पाठशाला रायकेरा तालाब के पूर्व में सबसे ऊँचे स्थान पर चारो तरफ तालाब भी है। इनमें अभी भी कमल खिलते हैं।