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गुप्त नवरात्रि में ये मंत्र जप लिया तो तुरंत ही दूर होंगे संकट और माता का मिलेगा आशीर्वाद

A scene capturing the experience of receiving the blessings of Mata Dashavidya on the occasion of Gupt Navratri
Navratri Mantra Chanting: गुप्त नवरात्रि का पर्व तंत्र, मंत्र और शक्ति साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में मां आदिशक्ति की आराधना पूरे श्रद्धा भाव से करने पर जीवन के संकट दूर होते हैं और साधक को सुख, समृद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि गुप्त नवरात्रि के दौरान कुछ विशेष मंत्रों का विधिपूर्वक जप किया जाए तो माता दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होती हैं और भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।ALSO READ: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की पंचमी की देवी मां त्रिपुर भैरवी, जानिए पूजा विधि
 
यदि आप अपने जीवन के घोर संकटों, कर्ज, बीमारी या शत्रुओं से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो गुप्त नवरात्रि के दौरान नीचे दिए गए मंत्रों का पूरी निष्ठा और गोपनीयता के साथ जप करें। 
 
आइए जानते हैं गुप्त नवरात्रि में कौन-से मंत्रों का जप करना शुभ माना जाता है और इन्हें किस विधि से करना चाहिए...।

 

संकट नाश और सर्वकल्याण के लिए महामंत्र

यदि जीवन में चौतरफा परेशानियां आ रही हों और कोई रास्ता न सूझ रहा हो, तो दुर्गा सप्तशती का यह सिद्ध मंत्र तुरंत असर दिखाता है:
 

'शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तुते॥'

 
महत्व: यह मंत्र हर प्रकार के संकट को हरने और माता की शरण में आए भक्त की रक्षा करने के लिए अचूक माना गया है।
 

'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।'

 
महत्व: यह नवार्ण मंत्र ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली मंत्रों में से एक है। यह जातक के चारों तरफ एक सुरक्षा कवच बना देता है, जिससे कोई भी नकारात्मक शक्ति या शत्रु उसका बाल भी बांका नहीं कर पाता।
 

मंत्र जप की गुप्त और सही विधि 

गुप्त नवरात्रि की साधना तभी फलित होती है जब इसे पूरी तरह "गुप्त" रखा जाए। जप करते समय इन नियमों का पालन अवश्य करें:
 
गोपनीयता: आप कौन से मंत्र का जप कर रहे हैं और कितनी संख्या में कर रहे हैं, यह बात आपके अलावा किसी दूसरे व्यक्ति को पता नहीं होनी चाहिए।
 
समय: गुप्त नवरात्रि में निशीथ काल (मध्यरात्रि/रात 11:00 से 1:00 बजे का समय) में किया गया जप सबसे जल्दी सिद्ध होता है।
 
आसन और माला: लाल रंग के ऊनी आसन पर बैठें और रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से मंत्र का जप करें।
 
दिशा: जप के समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
 
दीपक: पूजा के दौरान शुद्ध घी या सरसों के तेल का अखंड दीपक या जप काल तक जलने वाला दीपक अवश्य जलाएं।
 
विशेष सलाह: मंत्र जप की शुरुआत करने से पहले भगवान गणेश और अपने गुरु (यदि हों) का स्मरण अवश्य करें, ताकि साधना बिना किसी विघ्न के पूरी हो सके।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की चतुर्थी की देवी मां भुवनेश्वरी, जानिए पूजा विधि

Maa bhairavi Mantra
लेखक के बारे में
राजश्री कासलीवाल
श्रीमती राजश्री कासलीवाल पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव। धर्म, व्रत-त्योहार, ज्योतिष, रेसिपी, साहित्य, लाइफ स्टाइल और अन्य विषयों पर लेखन का कार्य। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सीनियर सब-एडिटर (कंटेंट) के पद पर कार्यरत हैं।  .... और पढ़ें
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