भगवान जगन्नाथ की मौसी कौन हैं? जानिए रथयात्रा से जुड़ी यह रोचक परंपरा
16 से 26 जुलाई तक जगन्नाथ रथयात्रा का उत्सव रहेगा। पौराणिक मान्यताओं और जगन्नाथ संस्कृति के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की मौसी देवी अर्धसिनी हैं, जिन्हें श्रद्धा से 'मौसी मां' कहा जाता है। भगवान जगन्नाथ की मौसी और उनसे जुड़ी परंपराओं के बारे में कुछ बेहद खास बातें।
1. मौसी मां का मंदिर (Mausi Maa Temple)
उड़ीसा के पुरी में मुख्य जगन्नाथ मंदिर और गुंडिचा मंदिर के बीच 'बड़ा डांड' (Grand Road) पर मौसी मां का एक छोटा सा मंदिर स्थित है। देवी अर्धसिनी को ही मौसी मां के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इन्होंने एक बार पुरी को समुद्र की बाढ़ से बचाया था, इसलिए इन्हें पुरी की रक्षक देवी भी माना जाता है।
2. रथ यात्रा और मौसी मां का संबंध
रथ यात्रा का प्रस्थान: आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को भगवान जगन्नाथ, अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर (जिसे भगवान का मौसी घर या जनकपुर भी कहा जाता है) जाते हैं। गुंडिचा असल में राजा इंद्रद्युम्न की रानी थीं, जिन्होंने मंदिर का निर्माण कराया था। लोक मान्यताओं में गुंडिचा मंदिर को ही मौसी का घर माना जाता है।
बहुड़ा यात्रा (वापसी) और विशेष प्रसाद: जब नौ दिनों के बाद भगवान वापस मुख्य मंदिर लौटते हैं (जिसे 'बहुड़ा यात्रा' कहते हैं), तो उनका रथ मौसी मां (अर्धसिनी) के मंदिर के सामने रुकता है।
पोड़ा पीठा (Poda Pitha): यहाँ मौसी मां भगवान जगन्नाथ को उनका पसंदीदा व्यंजन 'पोड़ा पीठा' (चावल, नारियल, छेना और गुड़ से बना एक विशेष बेक्ड केक) खिलाती हैं। इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद ही भगवान का रथ मुख्य मंदिर की ओर आगे बढ़ता है।

