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Religious Places | मां कात्यायिनी मंदिर

...जहां मां कात्यायिनी को चढ़ता हैं दूध व गांजा

धार्मिक स्थल
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गांजा व दूध अक्सर भगवान शिव को ही चढा़या जाता है, लेकिन बिहार के खगड़िया जिले में एक ऐसा सिद्घपीठ है। जहां पर यह सामग्री माताजी को समर्पित की जाती है।

पटना के मानसी जंक्शन से लगभग 12 किलोमीटर उत्तर में सहरसा रेलखंड पर धमारा स्टेशन के समीप मां कात्यायिनी का मंदिर है। जिसके बारे में कहा जाता है कि भगवती की बाईं भुजा यहीं कट कर गिरी थी। यह कोसी इलाके में शक्ति पीठ के नाम से प्रसिद्घ है। मां को प्रसन्न करने के लिए अक्सर यहां के लोग दूध व गांजा का प्रसाद चढा़ते हैं।

इस मंदिर के पुजारी सुरेंद्र भगत के अनुसार पौराणिक कथा के अनुसार मां सती के पिता राजा दक्ष द्वारा एक यज्ञ का आयोजन किया गया था। इस यज्ञ में सभी लोगों को निमंत्रण भेज कर बुलाया गया लेकिन भगवान शिव को नहीं बुलाया गया। परंतु मां सती भगवान शिव द्वारा लाख मना करने पर भी वहां पहुंच गई।

बिना निमंत्रण मां पार्वती के वहां उपस्थित होने पर वहां के लोगों द्वारा व्यंग्य किया गया। इस पर मां पार्वती को आत्म ग्लानि महसूस हुई कि वह अपने परमेश्वर की बात न मान कर यहां चली आई। यह आत्मग्लानि मां को बर्दाश्त नहीं हुई और वह यज्ञ में बने हवन कुंड में कूद पड़ी।

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तब भगवान शिव वहां पहुंच कर हवन कुंड से माता का जला शरीर लेकर तांडव करने लगे। तांडव के दौरान मां पार्वती का बाईं भुजा कट कर इसी स्थान पर गिरी थी। पूर्व में बियाबान जंगल में मिट्टी के एक घर में मां कात्यायिनी की बांह स्थापित थी।

इसी मंदिर परिसर में श्रीपत महाराज की पूजा भी होती है। यहां के वृद्घजन बताते हैं कि श्रीपत महाराज मधेपुरा के बीड़ी गमल गांव के निवासी थे। वह गाय चराने का काम करते थे। वह रोज मां कात्यायिनी की पूजा करते थे।

एक दिन श्रीपत महाराज बाघ का शिकार हो गए। वे ही मां कात्यायिनी की प्रतिदिन पूजा करते थे। इसलिए मां कात्यायिनी के साथ-साथ उनकी भी पूजा होती है। श्रीपत महाराज को भी गांजा चढ़ता है।