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Hanuman Jayanti Special | प्रसिद्ध हनुमान मंदिर

- हेमंत उपाध्याय

हनुमान जयंती विशेष
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हनुमानजी की जयंती देश भर में उल्लास के साथ मनाई जा रही है। हनुमान जी को प्रसन्न करने के विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं। प्रस्तुत है, इंदौर स्थित प्राचीनतम एवं सिद्ध हनुमान मंदिरों की जानकारी :

खजूर के पेड़ से निकली थी प्रतिमा : इंदौर के पंचकुइया क्षेत्र की वीर बगीची में स्थित हनुमान मंदिर करीब 400 साल पुराना बताया जाता है। इस मंदिर में स्थापित प्रतिमा खजूर के पेड़ से निकली थी, जिसे बाद में ऊपर लाकर मंदिर में स्थापित किया गया। यह मंदिर अग्निअखाड़े से संबंधित है।

मंदिर की चौथी पीढ़ी के पुजारी मोहनलाल पारीख ने बताया कि मंदिर से जुड़े कई चमत्कार हैं। लेकिन एक बात तय है कि यहाँ आने पर व्यक्ति के मन को शांति मिलती है। हनुमान जयंती पर यहाँ विशेष आयोजन होते हैं। पूजा-अर्चना और महाआरती के साथ ही यहाँ आयोजित भंडारे में हजारों श्रद्धालु प्रसादी ग्रहण करते हैं।

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रणजीत हनुमान मंदिर का अस्तित्व: बात है वर्ष-1907 की तब गुमाश्ता नगर क्षेत्र में बसाहट नहीं हुई थी। वहीं पहलवानी का शौक रखने वाले अल्हड़सिंह भारद्वाज हनुमानजी के उपासक थे। उन्होंने तब इस वीरान जंगल क्षेत्र में पतरे की ओट लगाकर हनुमानजी की प्रतिमा स्थापित कर दी और छोटा सा अखाड़ा बना दिया। इस तरह रणजीत हनुमान मंदिर अस्तित्व में आया। स्वर्गीय अल्हड़सिंह के पोते विजयसिंह भारद्वाज बताते हैं कि इस मंदिर से जुड़े अनगिनत किस्से हैं।

भारद्वाज के पिता जगदीशसिंह ने वर्ष-1990 में तीसरी बार मंदिर का नवीनीकरण किया। भारद्वाज परिवार ने 2005 तक इस मंदिर की सेवा की और अब यह मंदिर शासन के अधिकार में है। रामनवमी और हनुमान जयंती पर यहाँ विशेष श्रृंगार, अनुष्ठान, पूजापाठ और आरती की जाती है।

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मनमोहक हैं बाल हनुमान : राजवाड़ा के पास (खजूरी बाजार) स्थित श्रीराम भक्त बाल हनुमान मंदिर काफी प्राचीन है। यहाँ भक्तों की आस्था का आलम यह है कि करीब साढ़े तीन साल तक चोला चढ़ाने वालों के नाम तय हो चुके हैं। इस मंदिर की आठवीं पीढ़ी के पुजारी अभिषेक दुबे ने बताया कि उनके पूर्वजों ने इस मंदिर को स्थापित किया था। सबसे पहले पुजारी भाऊराम भट्ट थे।

यहाँ बाल भक्त हनुमान की लघु और आकर्षक प्रतिमा है जो हाथ जोड़कर खड़ी है। इसके सामने ही श्रीराम दरबार है। मंदिर में 40 साल से निरंतर करीब डेढ़ घंटे आरती होती है। हनुमान जयंती पर यहाँ अभिषेक के साथ विशेष चोला चढ़ाया जाता है। रात में स्वर्ण श्रृंगार कर जन्मआरती की जाती है। सुबह छ: बजे होने वाली आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

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सिद्धेश्वर वीर हनुमान मंदिर : चिड़ियाघर के सामने स्थित सिद्धेश्वर वीर हनुमान मंदिर करीब 120 साल पुराना बताया जाता है। यहाँ हर मंगलवार श्रद्धालुओं का ताँता लगा रहता है। मंदिर के पुजारियों में से एक विद्याशंकर शुक्ला बताते हैं कि यह मंदिर निजी है और उनके परिवार की सातवीं पीढ़ी पूजापाठ और मंदिर की व्यवस्था संभालती है। शुक्ला ने बताया कि मंदिर की मूर्ति दिव्य स्वरूप में है और पहली बार में ही भक्त अपलक मूर्ति को निहारने पर बाध्य हो जाता है। हनुमान जयंती पर यहाँ रुद्राभिषेक, स्वर्ण श्रृंगार और महाआरती होगी।

दक्षिणमुखी संजीवनी हनुमान : नरसिंह मंदिर, नरसिंह बाजार में स्थित दक्षिण मुखी संजीवनी हनुमान का मंदिर करीब डेढ़ सौ वर्ष पुराना है। पाँच फुट ऊँची दक्षिणमुखी प्रतिमा संजीवनी पर्वत धारण किए काफी चमत्कारी है। यहाँ वर्षभर में करीबन 25 श्रृंगार चोले मूर्ति को धारण कराए जाते हैं।