durgotsav | पूर्वमुखी माँ दुर्गा मंदिर
पुराना माँ की प्रतिमा में झलकता है तेज
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पुरानी मान्यता के अनुसार श्रीमंत महाराजा तुकोजीराव होलकर प्रथम को माँ ने सपने में दर्शन देकर आदेश दिया कि प्रतिमा को महेश्वर में नर्मदा से निकालकर हाथी पर इंदौर लाया जाए। हाथी पर विराजी प्रतिमा जिस स्थान पर रुक जाए, वहीं इसे प्रतिष्ठापित कर दिया जाए।
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पं. शरद नारायण ने बताया कि नवरात्रि पर माँ का विशेष श्रृंगार किया जाता है। पूजन-अर्चन पूर्णतः महाराष्ट्रीयन पद्घति से होता है। नौ गज की साड़ी माँ की प्रतिमा पर चढ़ाई जाती है। यहाँ अमावस्या व पूर्णिमा पर विशेष पूजन व अभिषेक किया जाता है।
माँ की महिमा के कई किस्से श्रद्घालुओं से सुने जा सकते हैं, जो नियमित रूप से देवी स्थल पर आते हैं। माँ अपने भक्तों को आरती के समय विभिन्न रूपों में दर्शन देती हैं।

