dharma sangrah
✕

51 Shaktipeeth : सावित्री देवीकूप भद्रकाली पीठ कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ-31

Updated: शनिवार, 17 अक्टूबर 2020 (16:54 IST)
देवी भागवत पुराण में 108, कालिकापुराण में 26, शिवचरित्र में 51, दुर्गा शप्तसती और तंत्रचूड़ामणि में शक्ति पीठों की संख्या 52 बताई गई है। साधारत: 51 शक्ति पीठ माने जाते हैं। तंत्रचूड़ामणि में लगभग 52 शक्ति पीठों के बारे में बताया गया है। प्रस्तुत है माता सती के शक्तिपीठों में इस बार सावित्री देवीकूप भद्रकाली पीठ कुरुक्षेत्र हरियाणा शक्तिपीठ के बारे में जानकारी।
 
कैसे बने ये शक्तिपीठ : जब महादेव शिवजी की पत्नी सती अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में अपने पति का अपमान सहन नहीं कर पाई तो उसी यज्ञ में कूदकर भस्म हो गई। शिवजी जो जब यह पता चला तो उन्होंने अपने गण वीरभद्र को भेजकर यज्ञ स्थल को उजाड़ दिया और राजा दक्ष का सिर काट दिया। बाद में शिवजी अपनी पत्नी सती की जली हुई लाश लेकर विलाप करते हुए सभी ओर घूमते रहे। जहां-जहां माता के अंग और आभूषण गिरे वहां-वहां शक्तिपीठ निर्मित हो गए। हालांकि पौराणिक आख्यायिका के अनुसार देवी देह के अंगों से इनकी उत्पत्ति हुई, जो भगवान विष्णु के चक्र से विच्छिन्न होकर 108 स्थलों पर गिरे थे, जिनमें में 51 का खास महत्व है।
 
सावित्री पीठ कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ : हरियाणा के कुरुक्षेत्र में माता की एड़ी (गुल्फ) गिरी थी। इसकी शक्ति है सावित्री और भैरव है स्थाणु। देविकूप भद्रकाली मंदिर को सावित्री पीठ, देवी पीठ, कालिका पीठ या आदी पीठ भी कहा जाता है। कुरुक्षेत्र में महाभारत युद्ध के पहले श्रीकृष्ण के कहने पर अर्जुन ने यहां माता की आराधना की थी। 
 
इस पीठ में भद्रकाली विराजमान है और गणों के रूप में दक्षिणमुखी हनुमान, गणेश तथा भैरव विद्यमान हैं। यहीं स्थाणु शिव का अद्भुत शिवलिंग भी है, जिसमें प्राकृतिक रूप से ललाट, तिलक एवं सर्प अंकित हैं। यह शक्तिपीठ हरियाणा के कुरुक्षेत्र जंक्शन तथा थानेश्वर रेलवे स्टेशन के दोनों ओर से 4 किलोमीटर दूर झांसी मार्ग पर, द्वैपायन सरोवर के पास स्थित है। 

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

वक्री शनि के चलते 4 राशियों को मिलेगा 11 दिसंबर तक फायदा, जल्दी से निपटा लें काम

शुक्र का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश: सूर्य-शुक्र युति से 12 राशियों के जीवन में आएंगे बड़े बदलाव

सूर्य गोचर 2026: तुला राशि में प्रवेश से दिवाली पर इन राशियों को मिलेगा बड़ा सरप्राइज

Vijayadashami 2026: दशहरा पर अपराजिता देवी पूजा, शस्त्र पूजा, रावण दहन और वाहन खरीदी के शुभ मुहूर्त व संपूर्ण विधि

Diwali Lakshmi puja 2026: दिवाली कब है, कब करें लक्ष्मी पूजा?

अगला लेख