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चीनी राखियां नहीं शुद्ध वैदिक राखी से मनाएं त्योहार

Updated: शुक्रवार, 16 अगस्त 2024 (11:47 IST)
Vaidik Rakhi 2022
 

वर्ष 2022 में रक्षा बंधन का पर्व (Raksha Bandhan 2022 Date) 11 अगस्त, गुरुवार को पड़ रहा है और धर्म शास्त्रों में इस दिन को वैदिक विधि से मनाना श्रेष्ठ माना गया है। मान्यतानुसार इस विधि से राखी पर्व मनाने पर भाई का जीवन सुखमय और शुभ बनता है। 
 
शास्त्रानुसार इसके लिए 5 वस्तुओं का विशेष महत्व होता है, जिनसे रक्षासूत्र का निर्माण किया जाता है। इनमें दूर्वा (घास), अक्षत (चावल), केसर, चंदन और सरसों के दाने शामिल हैं। इन 5 वस्तुओं को रेशम के कपड़े में बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावे में पिरो दें। इस प्रकार वैदिक राखी (Vaidik Rakhi) तैयार हो जाएगी।

 
5 वस्तुओं का मह‍त्व- दूर्वा (घास)- जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर बो देने पर तेजी से फैलता है और हजारों की संख्या में उग जाता है। उसी प्रकार रक्षा बंधन पर भी कामना की जाती है कि भाई का वंश और उसमें सदगुणों का विकास तेजी से हो। सदाचार, मन की पवित्रता तीव्रता से बढ़ती जाए। दूर्वा विघ्नहर्ता गणेश जी को प्रिय है अर्थात् हम जिसे राखी बांध रहे हैं, उनके जीवन में विघ्नों का नाश हो जाए।
 
किन 5 पवित्र चीजों से बनती है, पढ़ें विधि- 
 
अक्षत (चावल)- हमारी परस्पर एक दूजे के प्रति श्रद्धा कभी क्षत-विक्षत ना हो सदा अक्षत रहे।
 
केसर- केसर की प्रकृति तेज होती है अर्थात् हम जिसे राखी बांध रहे हैं, वह तेजस्वी हो। उनके जीवन में आध्यात्मिकता का तेज, भक्ति का तेज कभी कम ना हो।
 
चंदन- चंदन की प्रकृति शीतल होती है और यह सुगंध देता है। उसी प्रकार उनके जीवन में शीतलता बनी रहे, कभी मानसिक तनाव ना हो। साथ ही उनके जीवन में परोपकार, सदाचार और संयम की सुगंध फैलती रहे।
 
 
सरसों के दाने- सरसों की प्रकृति तीक्ष्ण होती है अर्थात् इससे यह संकेत मिलता है कि समाज के दुर्गुणों को, कंटकों को समाप्त करने में हम तीक्ष्ण बनें। सरसों के दाने भाई की नजर उतारने और बुरी नजर से भाई को बचाने के लिए भी प्रयोग में लाए जाते हैं। 
 
कैसे बांधें यह राखी- इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई एक राखी को सर्वप्रथम भगवान के चित्र पर अर्पित करें। फिर बहनें अपने भाई को, माता अपने बच्चों को, दादी अपने पोते को शुभ संकल्प करके बांधें। इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई वैदिक राखी को शास्त्रोक्त नियमानुसार बांधते हैं, वह पुत्र-पौत्र एवं बंधुजनों सहित वर्षभर सुखी रहते हैं।
 
 
राखी बांधने का मंत्र- राखी को सर्वप्रथम भगवान के चित्र पर अर्पित करें। फिर बहनें अपने भाई को, माता अपने बच्चों को, दादी अपने पोते को शुभ संकल्प करके बांधें। राखी बांधते समय बहन अवश्य बोलें यह मंत्र- 
 
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वां अभिबद्धनामि रक्षे मा चल मा चल।।
 
शिष्य गुरु को रक्षासूत्र बांधते समय यह मंत्र बोलें
 
‘अभिबद्धनामि‘ के स्थान पर ‘रक्षबद्धनामि कहे।
 
रक्षासूत्र बांधते समय मिठाई या गुड़ से मुंह मीठा कराना ही उत्तम रहता है।

Raksha Bandhan 2022
 


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