7 बड़े धर्मान्तरण और भारत बन गया बहुधर्मी देश

सिख धर्म : 15वीं शताब्‍दी में सिख धर्म के संस्‍थापक गुरुनानक ने एकेश्‍वर और भाईचारे पर बल दिया। भारत के पंजाब में इस धर्म की उत्पत्ति हिन्दू और मुसलमान के बीच बढ़ रहे वैमनस्य के चलते हुई। सिखों ने कभी धर्मांतरण का कार्य नहीं किया। यह वह काल था जबकि पंजाब के हर हिन्दू घर में से एक व्यक्ति धर्म और देश की रक्षा करने के लिए एक सिख होता था।
क्रूर मुस्लिम शासकों के अत्याचार से कश्मीरी पंडितों और देश के अन्य भागों से भाग रहे हिन्दुओं को बचाने के लिए नौवें गुरु तेगबहादुरजी (1621-1675 ईस्वी) ने बलिदान दे दिया था। गुरु तेगबहादुरसिंह ने धर्म की रक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया और सही अर्थों में 'हिन्द की चादर' कहलाए। बाद में 'खालसा पंथ' की स्थापना हुई। गुरु गोविंद सिंह और महाराजा रणजीत सिंह के काल में गैर मुस्लिमों ने स्वयं को सुरक्षित महसूस किया।> > अगले पन्ने पर छठी घटना...



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