7 बड़े धर्मान्तरण और भारत बन गया बहुधर्मी देश

बौद्ध धर्म : जब भारत में आर्य या कहें कि वैदिक धर्म का पतन हो चला था। तरह-तरह की जातियों में बंटकर लोग मनमानी पूजा, पाठ और कर्मकांड में विश्वास करने लगे थे। लगभग इसी दौर में 563 ईसा पूर्व भगवान बुद्ध का अवतरण हुआ। बुद्ध हैं अंतिम सत्य> >
गौतम बुद्ध एक क्षत्रिय राजकुमार थे। बुद्ध से प्रभावित होकर भारत में भिक्षु होने की होड़ लग गई थी। बुद्ध के उपदेशों का चीन और कुछ अन्‍य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भी प्रचार हुआ। बुद्ध पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने धर्म को दुनिया की सबसे बेहतर आध्यात्मिक व्यवस्था दी और संपूर्ण ज्ञान को श्रे‍णीबद्ध किया। भगवान बुद्ध का धर्म भारत के सभी प्राचीन धर्मों का नवीनतम और अंतिम संस्करण है। बुद्ध दुनिया के पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने समाज में व्याप्त भेदभाव को मिटाकर समाज को धार्मिक आधार पर एक करने का कार्य किया।
सारनाथ (वाराणसी के समीप) वह स्थान है, जहां भगवान बुद्धदेव ने 5 भिक्षुओं के सामने धम्मचक्कपवनत्तनसुत (प्रथम उपदेश) दिया। इसके बाद आनंद, अनिरुद्ध, महाकश्यप, रानी खेमा (महिला), महाप्रजापति (महिला), भद्रिका, भृगु, किम्बाल, देवदत्त, उपाली, अंगुलिमाल, मिलिंद (यूनानी सम्राट), सम्राट अशोक, ह्वेन त्सांग, फा श्येन, ई जिंग, हे चो आदि ने भारत और भारत के बाहर बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार किया। उस काल में दुनिया की आधी आबादी लगभग बौद्ध हो चुकी थी। अफगानिस्तान का बामियान और भारत का कश्मीर-वैशाली बौद्धों का गढ़ बन चुका था। प्रथम संगीति के बाद बौद्ध धर्म भी संप्रदायों में विभक्त हो गया। पहली चतुर्थ बौद्ध संगीति कश्मीर में हुई थी।

हालांकि बौद्ध धर्म का विस्तार भारत में प्रारंभिक काल में बौद्ध भिक्षुओं के प्रचार-प्रसार के चलते ही हुआ था लेकिन बाद में जब कुछ राजाओं ने बौद्ध धर्म अपना लिया तब यह कुछ राज्यों का राजधर्म बन गया। फिर सम्राट अशोक के काल में बौद्ध धर्म दुनिया के कोने-कोने में फैल गया। सम्राट अशोक ने अपने शासन तंत्र को बौद्ध धर्म का विस्तार करने में लगा दिया था।

संप्रदाय : भगवान बुद्ध के समय किसी भी प्रकार का कोई पंथ या संप्रदाय नहीं था किंतु बुद्ध के निर्वाण के बाद द्वितीय बौद्ध संगीति में भिक्षुओं में मतभेद के चलते दो भाग हो गए। पहले को महायान और दूसरे को कहते हैं। हीनयान को ही थेरवाद भी कहते हैं। महायान के अंतर्गत बौद्ध धर्म की एक तीसरी शाखा थी वज्रयान। झेन, ताओ, शिंतो आदि अनेक बौद्ध संप्रदाय भी उक्त दो संप्रदाय के अंतर्गत ही माने जाते हैं। भरत से बाहर बौद्ध धर्म को भिक्षु बोधिसत्व, महाकश्यप, सम्राट मिलिंद, सम्राट अशोक, ह्वेन त्सांग, फा श्येन, ई जिंग, हे चो आदि ने फैलाया। चीन, जापान, बर्मा, थाइलैंड, कोरिया सहित आदि सभी पूर्व के देश बौद्ध धर्म अंगिकार कर चुके थे।

नवबौद्ध : इसके अलावा बौद्ध धर्म का एक और संप्रदाय है जिसकी उत्पत्ति भारत की आजादी के बाद हुई। इसे अम्बेडकरवादियों का नवबौद्ध संप्रदाय कहते हैं। हिन्दुओं में जातिवाद की भावना ईस्वी सन् की प्रारंभिक सदियों में ही पनपने लगी थी। वर्ण जब जाति बन गए तो कुछ उच्च वर्ग के लोगों के समाज बन गए जिन्होंने पिछड़े लोगों का शोषण करना शुरू किया। इस जाति व्यवस्था को मुगल और अंग्रेज काल में बढ़ावा मिला और फिर भारत की आजादी के बाद राजनीतिज्ञों ने इसका भरपूर दोहन किया जिसके चलते हिन्दू समाज में बिखराव और तनाव की प्रवृत्ति बढ़ने लगी। इसी का परिणाम यह हुआ कि के प्रति कुछ लोगों ने नफरत को बढ़ावा देकर समाज में विभाजन पैदा कर दिया। उल्लेखनीय है कि भगवान बुद्ध ने नफरत के आधार पर कभी अपना धर्म खड़ा नहीं किया। बुद्ध के प्रभाव और ज्ञान के वशिभूत होकर ही प्राचीन काल में लोग बौद्ध मार्ग पर चले थे।

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