उत्तराखंड की चारधाम यात्रा की शुरुआत मंगलवार से यमुनोत्री और गंगोत्री मंदिरों के पट खुलने से

एन. पांडेय| पुनः संशोधित मंगलवार, 3 मई 2022 (09:21 IST)
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देहरादून। की चारधाम यात्रा की शुरुआत मंगलवार से होने जा रही है। मंगलवार 3 मई को अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री धाम के कपाट पूर्वाह्न 11.15 बजे और यमुनोत्री धाम के कपाट भी इसी दिन अपराह्न 12.15 बजे खुलेंगे। केदारनाथ धाम के कपाट 6 मई सुबह 6.25 और बद्रीनाथ धाम के कपाट 8 मई को 6 बजकर 15 मिनट पर खुलेंगे।

चारधाम यात्रा के लिए अब तक लगभग सवा तीन लाख तीर्थ यात्री पंजीकरण करा चुके हैं। इस बार यात्रा को लेकर यात्रियों में भारी उत्साह है यात्रा मार्ग पर आने वाले दो महीने के लिए होटलों में कमरों की बुकिंग फुल है। केदारनाथ हेली सेवा के लिए 20 मई तक टिकटों की एडवांस बुकिंग हो चुकी है।

गढ़वाल मंडल विकास निगम ने केदारनाथ में टेंट लगाकर यहां मौजूद गेस्ट हाउस और मंदिर के धर्मशाला के अलावा एक हजार लोगों के ठहरने की अतिरिक्त व्यवस्था की है। चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। रजिस्ट्रेशन गढ़वाल मंडल विकास निगम की वेबसाइट gmvnonline.com पर किया जा सकता है।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाने वालों के लिए हरिद्वार, देहरादून, चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिलों में 24 सेंटर बनाए गए हैं, जहां यात्री यात्रा शुरू करने से पहले रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। चारधाम पर आने वाले यात्रियों को क्यूआर कोड जारी किया जा रहा है। क्यूआर कोड यात्रियों को दिए जाने वाले रिस्ट बैंड में रहेगा। जिसे प्रत्येक धाम में स्कैन किया जाएगा। इससे पर्यटन विभाग को यह पता रहेगा कि कौन सा यात्री कहां पर है।
इससे यह पता लग सकेगा कि पंजीकरण करने वाले यात्री ने दर्शन किए हैं या नहीं। तीर्थयात्रियों और उनके वाहनों को आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा। अपनी गाड़ी से चारधाम यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को अपने वाहनों की फिटनेस चेक करानी होगी, ये काम हरिद्वार के RTO और ऋषिकेश के ARTO ऑफिस में करा सकते हैं।

समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर स्थित चारों धाम के यात्रियों को सांस की बीमारी से परेशान लोगों को अपने साथ ऑक्सीजन सिलेंडर भी रखना चाहिए।यमुनोत्री धाम की ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 3,293 मीटर है।
यमुनोत्री धाम यमुना की विशाल पर्वत चोटियों, ग्लेशियरों और खूबसूरत पानी के साथ साथ पर्यटकों को आमंत्रित करता है। वेदों के अनुसार देवी यमुना को सूर्य की बेटी और यम देव की जुड़वां बहन माना जाता है। यमुनोत्री धाम असित मुनि का निवास हुआ करता था। यहां वर्तमान मंदिर का निर्माण जयपुर की महारानी गुलेरिया ने 19वीं सदी में करवाया।
भूकंप से मंदिर का विध्वंस होने के बाद वर्ष 1919 में टिहरी के महाराजा प्रताप शाह ने इसका पुनर्निर्माण कराया। मंदिर के गर्भगृह में देवी यमुना की काले संगमरमर की मूर्ति विराजमान है।
गंगोत्री उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में 3048 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। गंगोत्री से गंगा नदी का उद्गम होता है। यहां देवी गंगा का मंदिर है। यहां देवी गंगा का मंदिर है। राजा भागीरथ ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए यहीं तप किया था। उन्होंने गंगा को अपनी जटाओं में धारण कर उसका वेग शांत किया था। इसके बाद इसी क्षेत्र में गंगा की पहली धारा भी गिरी थी। भागीरथ के पुरखों का तारण तभी संभव हुआ।
18वीं सदी में गढ़वाल के गोरखा सेनापति अमर सिंह थापा ने वर्तमान मंदिर का निर्माण कराया, जो सफेद ग्रेनाइट के चमकदार 20 फीट ऊंचे पत्थरों से निर्मित है। जयपुर के राजा माधो सिंह द्वितीय ने वर्ष 1935 में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था, जिससे मंदिर की बनावट में राजस्थानी शैली की झलक दिखती है। यहां शिवलिंग के रूप में एक नैसर्गिक चट्टान भागीरथी नदी में जलमग्न है।

कहते हैं कि प्राचीन काल में यहां मंदिर नहीं था। यात्रा सीजन में भागीरथी शिला के निकट मंच पर देवी-देवताओं की मूर्तियां रखी जाती थीं। इन्हें श्याम प्रयाग, गंगा प्रयाग, धराली, मुखबा आदि गावों से यहां लाया जाता था और शीतकाल में फिर इन्हीं स्थानों पर लौटा दिया जाता था। गंगोत्री देहरादून से लगभग 300 किमी, ऋषिकेश से 250 किमी और उत्तरकाशी से 105 किमी दूर है।

इन दो धामों को जहां श्रद्धालुओं के लिए अक्षय तृतीया को खोला जाएगा वहीं केदारनाथ के पट को 6 मई और बद्रीनाथ को 8 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जायेगा।



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