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उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में आफत की बारिश बारिश, भूस्खलन और जलजमाव से लोग परेशान
देहरादून। सोमवार सुबह से बारिश, भूस्खलन, जलभराव से लोगों की परेशानियां बढ़ती दिखी। टिहरी, चमोली, उत्तरकाशी, थराली और मसूरी में बारिश ने जमकर तबाही मचाई। बदरीनाथ-राष्ट्रीय राजमार्ग जो 9 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद खोला गया था फिर बंद हो गया।
थराली-कर्णप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग पर लोल्टी के पास भारी बारिश के चलते रौद्र रूप ले चुके गदेरे के बहाव में बाइक समेत एक युवक बह गया। बाइक तो मिल गई लेकिन युवक की तलाश दिन भर जारी थी। बाइक सवार बागेश्वर जनपद निवासी बताया जा रहा है।
भारी बारिश से श्रीनगर-रुद्रप्रयाग मार्ग सिरोबगड़ पास 2 घंटे मार्ग बाधित रहा, जिसे बमुश्किल किसी तरह खोला जा सका केदारनाथ हाईवे पर स्थित डेंजर जोन भी सक्रिय होने की खबरें हैं।
उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री हाईवे रतूड़ी सेरा के पास बंद रहा। यमुनोत्री हाईवे भी फेडी के पास मलबा आने बाधित रहा। टिहरी जिले के कीर्ति नगर ब्लॉक में तेज बारिश के कारण सड़क पर खड़ी कार उफनते गदेरे में बह गई। देहरादून-मसूरी मार्ग भी किनक्रेग के पास मलबा आने से बंद रहा।
पर्वतीय क्षेत्रों में शनिवार रात से हो रही हुई बारिश पहले ही आफत का कारण बनी हुई है। टिहरी जिले के कैम्पटी में भारी बारिश से झरना उफान पर आ गया था। झरने के आसपास बड़ी मात्रा में मलबा जमा हो गया। इसके चलते रविवार को पुलिस ने पर्यटकों को झरने में जाने से रोक दिया था।
चमोली जनपद के देवाल में सौरीगाड़ ग्राम पंचायत के नागाड़ा में आकाशीय बिजली गिरने से चार बकरियों की मौत हो गई। यहीं के कोटेडा गांव में भूस्खलन से कृषि भूमि तबाह हो गई। रविवार को बागेश्वर जिले में मकान के भूस्खलन की चपेट में आने से एक बच्चे सहित दंपती की मौत हो गई। अल्मोड़ा में नदी में पिता पुत्र बह गए। वहीं टनकपुर में नाले में बहने से महिला की मौत हो गई।
अगले 2 दिन भारी बारिश का अनुमान : राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के मुताबिक 13 व 14 जुलाई को भी राज्य के कुमाऊं क्षेत्र में पिथौरागढ़, नैनीताल, गढ़वाल क्षेत्र में पौड़ी जिले में कहीं कहीं आकाशीय बिजली चमकने के साथ ही भारी बारिश का अनुमान है।
संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन का खतरा रहेगा। नदी नालों का जलस्तर बढ़ सकता है। इन दो दिन यलो अलर्ट जारी किया गया है। 15 और 16 जुलाई को भी यलो अलर्ट जारी किया गया है। इन दो दिनों में देहरादून, टिहरी, नैनीताल, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिले में आकाशीय बिजली चमकने के साथ ही भारी बारिश का अनुमान है।
13 से 16 जुलाई तक पर्वतीय क्षेत्र के संवेदनशील इलाकों में मामूली भूस्खलन, चट्टानों के धसने, लिंक, सड़कें और राजमार्गों के अवरुद्ध होने की घटनाएं हो सकती हैं। साथ ही कहीं कहीं नदी और नाले उफान पर होंगे।
अमलावा नदी को पार करना जोखिमपूर्ण हुआ। विकासनगर के साहिया के समीप कोठा तालसी छानी के लोग अमलावा नदीं को जान जोखिम में डालकर पार कर रहे है। स्थितियां इतनी भयावह हैं कि जरा सी चूक होते ही जान तक जा सकती है।
313 सड़कें बंद, 100 सड़कें खोली गई : अब तक पहाड़ों में रुक रुक कर लगातार जारी भारी बारिश के चलते हुए भूस्खलन से सोमवार सुबह तक तकरीबन 313 सड़कें बंद थीं। उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग में तैनात लोक निर्माण विभाग के नोडल अधिकारी मृत्युंजय शर्मा के अनुसार इनमें से 100 सड़कें खोली जा चुकी हैं। उनके अनुसार सड़कों को खोलने को उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर 413 जेसीबी लगाए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए हर 15 किलोमीटर की दूरी पर जेसीबी तैनात रखी गई है। जिससे कम समय में मार्ग खोले जा सकें।
