मंदसौर जिले में किसानों का आंदोलन उग्र, 6 की मौत

पुनः संशोधित मंगलवार, 6 जून 2017 (21:49 IST)
मंदसौर। के जिले के पिपल्यामंडी में किसानों के उग्र आंदोलन के दौरान मंगलवार को पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच हिंसक झड़प में गोली लगने के कारण हो गई और दो अन्य घायल हैं। हालात को देखते हुए मंदसौर जिला मुख्यालय और पिपल्यामंडी में कर्फ्यू लगा दिया गया है। मुख्यमंत्री ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। कांग्रेस ने घटना की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की है।


पुलिस सूत्रों के अनुसार कल रात से जारी किसानों के उग्र प्रदर्शन और आंदोलन के दौरान स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए आज सुबह लगभग 11 बजे पुलिस को गोलियां चलानी पड़ीं। पुलिस सूत्रों ने कहा कि हिंसक झड़पों में प्रभुलाल पाटीदार, कन्हैयालाल पाटीदार और बबलू पाटीदार की मौत हो गई। इनकी मौत गोली लगने के कारण हुई है। चार अन्य घायलों को बेहतर इलाज के लिए इंदौर भेजा गया, लेकिन रास्ते में सुरेंद्र, सत्यनारायण और एक अन्य की भी मौत हो गई। एक गंभीर घायल का इलाज इंदौर और एक घायल का इलाज मंदसौर जिला चिकित्सालय में चल रहा है।


सूत्रों ने बताया कि यहां से लगभग 20 किलोमीटर दूर पिपल्यामंडी में उपद्रवी आंदोलनकारियों को नियंत्रित करने के लिए गोलियां चलानी पडीं। घटना के बाद आसपास के जिलों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर तैनात किया गया है। हिंसा पर उतारू आंदोलनकारियों ने एक पुलिस चौकी को भी आग लगाने की कोशिश की लेकिन उसे असफल कर दिया गया।



इन घटनाओं के संबंध में जिले के वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है और वे सभी स्थिति को नियंत्रित करने में लगे हैं। मंदसौर के साथ पड़ोसी नीमच और रतलाम जिले में संचार सेवाएं व्हाट्सएप और इंटरनेट इत्यादि बंद कर दी गई है। अफवाहों को रोकने के प्रयास के तहत ऐसा किया गया है।

इस घटना के बाद मंदसौर जिला मुख्यालय और पिपल्यामंडी में कर्फ्यू लगा दिया गया है। कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि प्रशासन की पहली प्राथमिकता कानून व्यवस्था बनाए रखना है। पुलिस और प्रशासन पूरे जिले की स्थिति पर नजर रखे हुए है।



इसके पहले कल देर रात प्रदर्शनकारियों ने जिले के दलौदा में एक रेलवे फाटक को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने पटरियों की कनेक्टर क्लिप निकालने की कोशिश करते हुए पटरियां उखाड़ने का भी प्रयास किया। उग्र प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग और अश्रु गैस के गोले छोड़कर प्रदर्शनकारियों को वहां से हटवाया।

इधर, राजधानी भोपाल में आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री चौहान ने मंदसौर जिले के साथ ही आसपास के जिलों और से प्रभावित अन्य जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के भी निर्देश दिए हैं।चौहान ने कहा कि पिपल्यामंडी घटना की न्यायिक जांच कराई जाएगी। चौहान किसान आंदोलन से जुडी घटनाओं पर लगातार नजर रखे हुए हैं।

इस बीच भोपाल में गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने मीडिया से चर्चा में दावा किया कि पिपल्यामंडी में जिन लोगों की मौत हुई है, उसका कारण पुलिस की गोलियां नहीं हैं। यह पूछे जाने पर कि फिर गोलियां किसने चलाईं? उन्होंने कहा कि जांच में स्थिति साफ हो जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन पिपल्यामंडी ही नहीं पूरे राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और उसके अनुरूप कार्रवाई की जा रही है।

इन घटनाओं के संबंध में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी कुछ भी कहने से बचते हुए नजर आ रहे हैं। वहीं प्रदेश भाजपा की ओर से बुधवार को यहां मुख्यमंत्री निवास पर प्रस्तावित मुख्यमंत्री श्री चौहान का सम्मान समारोह स्थगित कर दिया गया है। राज्य में किसान आंदोलन की धमक के बीच प्रदेश भाजपा ने कल ही घोषणा की थी कि श्री चौहान का सम्मान किया जाएगा, क्योंकि उन्होंने राज्य के किसानों के हित में काफी कदम उठाए हैं। आज के घटनाक्रम के बीच यह कार्यक्रम नहीं करने का निर्णय लिया गया है।

इधर, प्रदेश कांग्रेस ने गोली चलने से किसानों की मौत की कड़ी निंदा करते हुए मुख्यमंत्री श्री चौहान से इस्तीफे की मांग की है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह सहित अन्य नेताओं ने यह मांग की है।
यादव और सिंह कल मंदसौर में किसानों की अंत्येष्टि में शामिल होने वहां जाएंगे। कांग्रेस सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने घटना की निंदा करते हुए इसे सरकार का कायराना कृत्य करार दिया है।

कांग्रेस ने कहा कि कल किसान संगठन द्वारा प्रदेश बंद के आह्वान का उनकी पार्टी ने समर्थन किया है। अजय सिंह ने किसानों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे बंद के दौरान संयम रखें, किसी भी भड़कावे में न आएं और शांतिपूर्वक तरीके से भाजपा के किसान विरोधी रवैये का विरोध करें। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कदम नहीं उठाएं, जिससे भाजपा और प्रदेश सरकार के आंदोलन को बदनाम करने के मंसूबे सफल हो सकें।



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