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सेतु बनाते वक्त जब श्रीराम का फेंका पत्थर पानी में नहीं तैरा तो हनुमानजी ने ये कहा...

राम सेतु कथा प्रसंग, राम नाम की महिमा

Written By WD Feature Desk
Updated: गुरुवार, 18 जनवरी 2024 (13:14 IST)
Ram Setu katha: राम नाम का इन दो अक्षर में ही पूरी रामायण है और पूरा शास्त्र है। पुराणों में लिखा है कि ज्ञान, कर्म, ध्यान, योग, तप आदि सभी कलयुग में व्यर्थ सिद्ध होंगे परंतु राम नाम का जप ही लोगों को भवसागर से पार ले जाने वाला सिद्ध होगा। वेद, पुराण और अन्य शास्त्रों से भी बढ़कर है दो अक्षरों वाला राम का नाम। राम नाम के दो सुंदर अक्षर सावन-भादो के महीने हैं। इस नाम की ही महिमा है कि जिसे सभी देवी और देवता जपते रहते हैं।
 
राम नाम की महिमा का प्रसंग:-
यह तो सभी जानते हैं कि रामसेतु के निर्माण के समय हर पत्थर पर राम नाम लिखा जा रहा था और हर कोई राम नाम का जयघोष कर रहा था जिसके चलते राम का काम बहुत ही आसान हो गया। राम के नाम लिखे पत्‍थर जब तेरने लगे तो प्रभु श्रीराम भी आश्चर्य में पड़कर सोचने लगे।
 
उन्होंने सोचा की जब मेरे नाम लिखे पत्‍थर तैरने लगे है तो यदि मैं कोई पत्‍थर फेंकता हूं समुद्र में तो उसे तेरना चाहिए। मन में यही विचार करके उन्होंने भी एक पत्थर उठा लिया जिस पर राम का नाम नहीं लिथा था और उसे समुद्र में फेंक दिया, लेकिन वह पत्‍थर डूब गया। भगवान श्री राम आश्चर्य में पड़ गए कि आखिर ऐसा क्यों हुआ?
हनुमानजी: दूर खड़े हनुमानजी ने यह सब देख रहे थे और तब उन्होंने प्रभु श्रीराम के मन की बात जानकर उनके पास पहुंचे और कहने लगे कि हे प्रभु! आप किस दुविधा में हैं?
 
राम जी: इस पर श्री राम जी कहने लगे कि हे हनुमान! मेरे नाम के पत्थर तैर रहे हैं लेकिन जब मैंने अपने हाथ से वह पत्थर फेंका तो वह डूब गया!
 
हनुमानजी: प्रभु के इस भोलेपन से कही गई बात पर बल-बुद्धि के दाता हनुमानजी ने कहा कि हे प्रभु! आपके नाम को धारण कर तो सभी अपने जीवन को पार लगा सकते हैं, परंतु जिसे आप स्वयं त्याग रहे हैं, उसे डूबने से कोई कैसे बचा सकता है?
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