ramcharitmanas
✕

प्रभु श्रीराम ने बनवाई थी ये 4 चीजें

Updated: सोमवार, 24 मई 2021 (16:41 IST)
प्रभु श्रीराम ने अयोध्या से निकलकर लंका तक के सफर में जहां जहां पर अपने पग धरे वहां वहां के खास स्थानों पर मंदिर, कुंड या रामालय बन गए। निश्‍चित ही लंका से लौटने के बाद प्रभु श्रीराम ने अयोध्या में कई तरह के कार्य किए होंगे। जैसे शिवालय बनवाना, महल, आश्रम, कुटी आदि बनवाना। परंतु हम बता रहे हैं ऐसे कार्य जो उन्होंने अपने वनवास के दौरान किए।
 
 
1. पर्णकुटी : श्रीराम जब गंगा पार करके चित्रकूट पहुंचे तो वहां गंगा यमुना के संगम पर ऋषि भारद्वार का आश्रम था। महर्षि ने वहीं एक पहाड़ी पर श्रीराम को कुटी बनाने की सलाह थी। श्रीराम ने वहां पर पर्णकुटी बनाई और वहीं रहने लगे। बाद में वे नासिक के पंचवटी क्षेत्र में गए तो वहां भी पर्टकुटी बनाई। फिर जब वे सीता की खोज में निकले तप रास्ते भर में जहां भी कुछ दिनों तक रुकना था वहां पर्णकुटी बनाई। बाद में रामेश्वरम में और फिर अंत में श्रीलंका में पर्णकुटिया बनाए जाने का उल्लेख मिलता है।
 
 
2. वस्त्र :ऐसा कहते हैं कि श्रीराम, श्रीलक्ष्मण और माता सीता खुद के ही बनाए वस्त्र और खड़ाऊ धारण करते थे।
 
 
3. शिवलिंग : महाकाव्‍य 'रामायण' के अनुसार भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने के पहले रामेश्वरम में भगवान शिव की पूजा की थी। रामेश्वरम का शिवलिंग श्रीराम द्वारा स्थापित शिवलिंग है।
 
 
4. सेतु बनवाया:इसके बाद प्रभु श्रीराम ने नल और नील के माध्यम से विश्व का पहला सेतु बनवाया था और वह भी समुद्र के ऊपर। आज उसे रामसेतु कहते हैं ज‍बकि राम ने इस सेतु का नाम नलसेतु रखा था।

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

Ganesh Visarjan 2026: गणपति विसर्जन की सरल विधि, जानें पूजा से लेकर विदाई तक के नियम

गणेश चतुर्थी 2026: गणपति को तीसरे दिन कौन सा भोग लगाएं, प्रसाद चढ़ाएं

बुध-शनि का समसप्तक योग: 4 राशियों के लिए शुरू होगा शुभ समय, करियर और धन में मिल सकता है बड़ा लाभ

ज्येष्ठा गौरी व्रत कथा और महत्व| Jyeshtha Gauri Vrat Katha

संतान सप्तमी 2026: क्‍यों किया जाता है संतान सातें व्रत? किसकी होती है पूजा? जानिए रोचक कथा...

अगला लेख