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पाक महीना रमजान शुरू, ये है कई मायनों में खास

Updated: गुरुवार, 17 मई 2018 (12:32 IST)
पवित्र महीना रमजान शुरू हो गया है। मुस्लिम समुदाय में रमजान की तैयारियां हो गई हैं। रमजान को लेकर बाजार में रोजा इफ्तार और सहरी के लिए खरीदारी की चहल-पहल नजर आ रही है। 
 
पवित्र रहमत और बरकत से भरा रमजान का महीना मोमिनों को अल्लाह से प्यार और लगन जाहिर करने के साथ खुद को खुदा की राह की सख्त कसौटी पर कसने का मौका देने वाला यह महीना बेशक हर बंदे के लिए नेमत है। रमजान में दिनभर भूखे-प्यासे रहकर खुदा को याद करने की मुश्किल साधना करते रोजेदार को अल्लाह खुद अपने हाथों से बरकतें नवाजता है।
 
यह महीना कई मायनों में अलग और खास है। अल्लाह ने इसी महीने में दुनिया में कुरान शरीफ को उतारा था जिससे लोगों को इल्म और तहजीब की रोशनी मिली। साथ ही यह महीना मोहब्बत और भाईचारे का संदेश देने वाले इस्लाम के सार-तत्व को भी जाहिर करता है। रोजा न सिर्फ भूख और प्यास बल्कि हर निजी ख्वाहिश पर काबू करने की कवायद है। इससे मोमिन में न सिर्फ संयम और त्याग की भावना मजबूत होती है बल्कि वह गरीबों की भूख-प्यास की तकलीफ को भी करीब से महसूस कर पाता है।
 
रमजान का महीना सामाजिक ताने-बाने को भी मजबूत करने में मददगार साबित होता है। इस महीने में सक्षम लोग अनिवार्य रूप से अपनी कुल संपत्ति का एक निश्चित हिस्सा निकालकर उसे 'जकात' के तौर पर गरीबों में बांटते हैं।
 
रमजान की शुरुआत सन् दो हिजरी से हुई थी और तभी से अल्लाह के बंदों पर जकात भी फर्ज की गई थी। रमजान के महीने में अल्लाह के लिए हर रोजेदार बहुत खास होता है और खुदा उसे अपने हाथों से बरकत और रहमत नवाजता है। इस माह में बंदे को 1 रकात फर्ज नमाज अदा करने पर 70 रकात नमाज का सवाब (पुण्य) मिलता है। साथ ही इसमें शबे कद्र की रात में इबादत करने पर 1 हजार महीनों से ज्यादा वक्त तक इबादत करने का सवाब हासिल होता है।
 
कुरान शरीफ में लिखा है कि मुसलमानों पर रोजे इसलिए फर्ज किए गए हैं ताकि इस खास बरकत वाले रूहानी महीने में उनसे कोई गुनाह नहीं होने पाए। यह खुदाई असर का नतीजा है कि रमजान में लगभग हर मुसलमान इस्लामी नजरिए से खुद को बदलता है और हर तरह से अल्लाह की रहमत पाने की कोशिश करते हैं।

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