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पितरों को मोक्ष दिलाती है फाल्गुन अमावस्या, आप नहीं जानते इसकी ये 5 बातें

Updated: मंगलवार, 5 मार्च 2019 (09:57 IST)
हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों के लिए वैसे तो प्रत्येक मास की अमावस्या का बहुत महत्व होता है, लेकिन फाल्गुनी अमावस्या का अपना ही एक विशेष महत्व होता है। यह हिंदू वर्ष की अंतिम अमावस्या भी होती है।
 
1 दरअसल हिन्दू कैलेंडर का अंतिम माह फाल्गुन माह होता है और इस माह में आने वाली अमावस्या फाल्गुन अमावस्या कहलाती है। महाशिवरात्रि के बाद मनाई जाने वाली यह फाल्गुन अमावस्या इस वर्ष 6 मार्च 2019 बुधवार को आ रही है। 
 
2 इसके महत्व का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि यह अमावस्या पितरों को मोक्ष दिलाने वाली होती है। पितरों की शांति के लिए किए जाने वाले दान, तर्पण, श्राद्ध आदि के लिए यह दिन बहुत ही अच्छा माना जाता है। 
 
3 साल भर  12 अमावस्याएं आती हैं। यदि निरंतरता में प्रत्येक अमावस्या को आप पितरों हेतु श्राद्ध नहीं कर पाते हैं तो कुछ अमावस्याएं विशेष तौर पर सिर्फ श्राद्ध कर्म के लिए शुभ मानी जाती हैं। फाल्गुन मास की अमावस्या उन्हीं में से एक है। सिर्फ श्राद्ध कर्म ही नहीं बल्कि कालसर्प दोष के निवारण हेतु भी अमावस्या का विशेष होता है। 
 
4 वैसे तो श्राद्ध पक्ष में हमेशा उसी तिथि को श्राद्ध किया जाता है जिस तिथि को दिंवगत आत्मा परलोक सिधारती है, लेकिन यदि यह संभव न हो और किसी कारण वह तिथि मालूम न हो तो प्रत्येक मास में आने वाली अमावस्या को यह किया जा सकता है। इस कार्य के लिए वर्ष भर की अमावस्या तिथि में से भी फाल्गुन अमावस्या का अत्यंत महत्व है। 
 
5 फाल्गुनी अमावस्या पर कई धार्मिक तीर्थों पर फाल्गुन मेलों का आयोजन भी होता है। साथ ही इस दिन गंगा स्नान बहुत ही शुभ माना जाता है। यह भी माना जाता है कि इस दिन संगम पर देवताओं का निवास होता है। 

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