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Chaitra Purnima 2026: चैत्र पूर्णिमा कब है क्या महत्व है इस दिन का और क्या करें इस दिन?

Written By WD Feature Desk
Updated: बुधवार, 1 अप्रैल 2026 (15:03 IST)
Chaitra Month Purnima: चैत्र माह की पूर्णिमा का हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्व है क्योंकि इसी दिन भगवान राम के परम भक्त हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। साथ ही, यह हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा होती है। वर्ष 2026 में चैत्र पूर्णिमा की तिथि और इसके महत्व की विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है:ALSO READ: Numerology Horoscope: साप्ताहिक अंक भविष्यफल: आपके मूलांक के आधार पर जानें 30 मार्च से 5 अप्रैल 2026 के अहम अवसर
 

चैत्र पूर्णिमा 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में चैत्र पूर्णिमा 2 अप्रैल 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी।
 
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 1 अप्रैल 2026 को सुबह 07:06 बजे से।
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 2 अप्रैल 2026 को सुबह 07:41 बजे तक।
 
उदया तिथि के अनुसार व्रत और पूजन 2 अप्रैल को ही किया जाएगा तथा हनुमान जन्मोत्सव का मुख्य पर्व 2 अप्रैल 2026 को ही मनाया जाएगा।

चैत्र पूर्णिमा के दिन चन्द्रोदय- 07:07 पी एम पर।

चैत्र पूर्णिमा का महत्व

हनुमान जन्मोत्सव: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अंजनी पुत्र हनुमान जी का जन्म चैत्र पूर्णिमा के दिन हुआ था। इसलिए इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यह हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा है यानी यह चैत्र मास (वर्ष के पहले महीने) की पूर्णिमा है, जो नई ऊर्जा और संकल्पों का प्रतीक है। इस दिन चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं के साथ पूर्ण होता है। चंद्र देव की पूजा तथा चंद्र दर्शन करने से मानसिक शांति और कुंडली में चंद्रमा दोष दूर होता है। इस दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण रूप की कथा सुनना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
 

इस दिन क्या करें, जानें पूजन विधि और उपाय

चैत्र पूर्णिमा पर शुभ फल प्राप्ति के लिए निम्नलिखित कार्य करने चाहिए:
 
1. पवित्र स्नान: सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी, सरोवर या घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
 
2. हनुमान जी की पूजा: हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करें। हनुमान जी को सिंदूर और चोला चढ़ाना इस दिन विशेष फलदायी होता है।
 
3. सत्यनारायण व्रत: भगवान विष्णु की पूजा करें, पीली मिठाई या हलवे का भोग लगाएं और सत्यनारायण की कथा सुनें।
 
4. दान-पुण्य: पूर्णिमा के दिन अन्न, जल या सफेद वस्तुओं (जैसे चावल, दूध, चीनी) का दान करना बहुत शुभ माना जाता है।
 
5. चंद्र देव को अर्घ्य: रात में चंद्रमा निकलने पर जल में कच्चा दूध और अक्षत मिलाकर अर्घ्य दें। इससे मानसिक तनाव कम होता है और सौभाग्य बढ़ता है।
 
6. पीपल की पूजा: पूर्णिमा के दिन पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाना और दीपक जलाना शुभ होता है क्योंकि इसमें मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का वास माना जाता है।
 
पूर्णिमा के दिन तामसिक भोजन अर्थात् प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा से दूर रहना चाहिए और क्रोध करने से बचना चाहिए।
 
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