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अनंत चतुर्दशी व्रत : भगवान विष्णु से करें यह प्रार्थना

Updated: रविवार, 3 सितम्बर 2017 (14:26 IST)
अनंत चतुर्दशी का व्रत अत्यंत पवित्र व्रत माना जाता है। इस व्रत करने वाले को धान के एक प्रसर आटे से रोटियां या पूड़ी बनानी चाहिए। जिनकी आधी ब्राह्मण को दें और शेष स्वयं प्रयोग में लाएं।  
 
इस दिन व्रती को चाहिए कि प्रात:काल स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त होकर कलश की स्थापना करें। कलश पर अष्टदल कमल के समान बने बर्तन में कुश से निर्मित अनंत की स्थापना की जाती है। इसके आगे कुंकूम, केसर या हल्दी से रंग कर बनाया हुआ कच्चे डोरे का चौदह गांठों वाला 'अनंत' भी रखा जाता है।  

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यूं तो यह व्रत नदी-तट पर किया जाना चाहिए और हरि की लोककथाएं सुननी चाहिए। लेकिन संभव ना होने पर घर में ही स्थापित मंदिर के सामने हरि से इस प्रकार की प्रार्थना की जाती है- 'हे वासुदेव, इस अनंत संसार रूपी महासमुद्र में डूबे हुए लोगों की रक्षा करो तथा उन्हें अनंत के रूप का ध्यान करने में संलग्न करो, अनंत रूप वाले प्रभु तुम्हें नमस्कार है।'

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