Daily Horoscope

अहोई अष्‍टमी के व्रत से मिटेगा संतान का कष्ट

Updated: शनिवार, 19 अक्टूबर 2019 (14:13 IST)
कार्तिक माह की कृष्‍ण अष्टमी को अहोई माता का व्रत रखा जाता है। कहते हैं कि अहोई का अर्थ अनहोनी को को होनी बनाना होता है। इस दिन अहोई माता की पूजा की जाती है। अहोई अष्टमी का व्रत महिलाएं अपनी संतानों की लंबी आयु के लिए रखती हैं। कुछ महिलाएं इस व्रत को संतान प्राप्ति के लिए भी करती हैं।
 
 
ऐसी मान्यता है कि अहोई अष्टमी का व्रत करने से अहोई माता खुश होकर व्रत करने वाली महिला के बच्चों की लंबी उम्र और सलामती का आशीर्वाद देती है। यह व्रत दिनभर निर्जल रहकर किया जाता है। अहोई माता का पूजन करने के लिए महिलाएं तड़के उठकर मंदिर में जाती हैं और वहीं पर पूजा के साथ व्रत प्रारंभ होता है। यह व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही खोला जाता है। 
 
महिलाएं इस दिन सायंकाल भक्ति-भावना के साथ दीवार पर अहोई की पुतली रंग भरकर बनाती हैं। उसी पुतली के पास सेई व सेई के बच्चे भी बनाती हैं। आजकल बाजार से अहोई के बने रंगीन चित्र कागज भी मिलते हैं जिनको लाकर उनकी पूजा की जा सकती है। कुछ महिलाएं पूजा के लिए चांदी की एक अहोई भी बनाती हैं, जिसे स्याऊ कहते हैं और उसमें चांदी के दो मोती डालकर विशेष पूजन किया जाता है।
 
तारे निकलने के बाद अहोई माता की पूजा प्रारंभ होती है। पूजन से पहले जमीन को स्वच्छ करके, पूजा का चौक पूरकर, एक लोटे में जलकर उसे कलश की भांति चौकी के एक कोने पर रख ते हैं और फिर भक्ति भाव से पूजा करते हैं। साथ ही अहोई अष्टमी की व्रत कथा का श्रद्धा भाव से श्रीवण किया जाता है।
 
कथा, पूजन और आरती के बाद माता को हलवा, पूड़ी और चना चढ़ाया जाता है। कुछ परिवारों में माता को पानी के साथ दूध और कच्चा चावल चढ़ाते हैं। पूजा के दौरान कहते हैं- अहोई जिये, अहोआ जिए। मुंशा जिए, पूता जिए।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 18 सितंबर 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

गणेश चतुर्थी 2026: गणपति को पांचवें दिन कौन सा भोग लगाएं, प्रसाद चढ़ाएं

बुधादित्य राजयोग से चमकेगा 4 राशियों का भाग्य! कन्या राशि में बुध-सूर्य की युति से मिलेंगे शुभ संकेत

भविष्य मालिका की भविष्यवाणी: क्या मक्का-मदीना में होगा घोर युद्ध? जानें क्या किया गया है दावा

नरेंद्र मोदी का जन्मदिन 17 सितंबर: जानिए कुंडली में क्या कहते हैं ग्रह-नक्षत्र और भविष्य के संकेत

अगला लेख