dharma sangrah

कोरोना पर कविता : प्रकृति करवट बदल रही

Updated: मंगलवार, 24 मार्च 2020 (18:14 IST)
सब कुछ बदल रहा,
इंसान बदल रहे,
मुस्कराहटें बदल रही, 
प्रकृति करवट बदल रही!
 
फिज़ाओं में रंग भर रहे,
निखर चमन खिल रहा, 
नई कोपलों जन्मी हैं,
प्रकृति करवट बदल रही!
 
भोर में चमक बढ़ रही,
धुंध भी छंट रही,
खग गीत गूंज रहे,
प्रकृति करवट बदल रही!
 
आर्द्रता संग भीगे नयन,
माथे पर चिंता की सलवटें,
कुछ अनजाना डर मन लिए,
प्रकृति करवट बदल रही!
 
सोचा इंसान ने जीत लिया जहान,
जानवर मान लजीज लिए प्राण,
प्रदूषण जल नभ वातावरण में,
प्रकृति करवट बदल रही!
 
कर्तव्यविमूढ़ निर्दयी इंसान,
बने रहे अज्ञानी अनजान,
किया मां धरती को अस्वस्थ,
प्रकृति करवट बदल रही!
 
हथियार, तकनीकी की होड़,
आज धरा है यहीं बेबस,
रंग, जाति, धर्म विवश,
प्रकृति करवट बदल रही!
 
कोरोना कहर बन टूटा, 
एक अबूझ पहेली-सी,
आज बन गई प्रकृति, 
प्रकृति करवट बदल रही!
 
अब तक जो भूले-भटके,
घर बैठो सोचो बन सपूत,
सबक ले लो ये प्रलय नहीं,
प्रकृति करवट बदल रही!
 
उदार प्रकृति मां है सबकी,
नभ, जल, थल, चर संतान उसकी,
विवेक रखो वक्त बदलेगा,
प्रकृति करवट बदल रही!
 
लेखक के बारे में
रेखा भाटिया

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंच पर बढ़ायी भारत की प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

नया भारत, नई उड़ान: मोदी युग में आत्मविश्वास का नया शिखर

17 सितंबर जन्मदिन पर विशेष: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में 25 दिलचस्प बातें

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

अगला लेख