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चैत्र नवरात्रि पर घट स्थापना और कलश स्थापना क्यों करते हैं?

Written By WD Feature Desk
Updated: शनिवार, 29 मार्च 2025 (14:03 IST)
when is chaitra navratri 2025:  चैत्र माह की नवरात्रि 30 मार्च 2025 रविवार से प्रारंभ होकर 6 अप्रैल को रामनवमी के बाद 7 अप्रैल को इसका समापन होगा। 4 अप्रैल को सप्तमी और 5 अप्रैल 2025 को दुर्गा अष्टमी रहेगी। नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना और कलश स्थापना करते हैं। घट स्थापना का सबसे ज्यादा महत्व शारदीय नवरात्रि पर रहता है परंतु कलश स्थापना तो सभी नवरात्रि में करते ही हैं। आओ जानते हैं कि ऐसा क्यों करते हैं। 
 
घटस्थापना मुहूर्त- प्रात: 06:13 से सुबह 10:22 के बीच।
घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:01 से 12:50 के बीच।
 
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ- 29 मार्च 2025 को शाम 04:27 बजे से।
प्रतिपदा तिथि समाप्त- 30 मार्च 2025 को 12:49 बजे तक।
उदयातिथि के अनुसार चैत्र नवरात्रि प्रतिपदा 30 मार्च को रहेगी।
 
क्यों करते हैं घट स्थापना?
घट अर्थात मिट्टी का घड़ा। इसे नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में ईशान कोण में स्थापित किया जाता है। घट में मिट्टी डालकर उसमें जौ उगाई जाती है। 8 से 9 दिनों में यह जौ उग जाती है। इस पात्र को माता दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष स्थापित करके इसका पूजन करें। नवरात्रि के समय ब्रह्मांड में उपस्थित शक्तियों का घट में आह्वान करके उसे कार्यरत किया जाता है। इससे घर की सभी विपदादायक तरंगें नष्ट हो जाती हैं तथा घर में सुख-शांति तथा समृद्धि बनी रहती है। 
 
क्यों करते हैं कलश स्थापना?
कलश को सुख- समृद्धि, ऐश्वर्य देने वाला तथा मंगलकारी माना जाता है। कलश के मुख में भगवान विष्णु, गले में रुद्र, मूल में ब्रह्मा तथा मध्य में देवी शक्ति का निवास माना जाता है। कलश में जल होता है। उसके मुख पर श्रीफल रखते हैं। जल विष्णु और वरुण देव का प्रतीक है और श्रीफल माता लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। कलश की पूजा करने से सभी देवी और देवताओं की पूजा हो जाती है। कलश पूजा के समय देवी- देवताओं का आह्वान करते हुए प्रार्थना करते हैं कि 'हे समस्त देवी-देवता, आप सभी 9 दिन के लिए कृपया कलश में विराजमान हों।'
 

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