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Written By भाषा
Last Modified: नई दिल्ली (भाषा) , रविवार, 12 अगस्त 2007 (21:09 IST)

जहर कैंसर के इलाज में कारगर

कोबरा वाइपर साँप कैंसर
काले कोबरा और वाइपर जैसे जहरीले साँपों का जहर कैंसर के इलाज में कारगर हो सकता है।

कोलकाता स्थित इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ कैमिकल बायोलॉजी के ड्रग डवलपमेंट डिवीजन के वैज्ञानिकों के एक दल ने पाया कि साँप के जहर में मौजूद प्रोटीन से कैंसर रोधी दवाएँ बनाई जा सकती हैं।

वैज्ञानिक अब जहर से उन प्रोटीन को अलग कर रहे हैं, जिनमें कैंसर रोधी गुण होते हैं और जो कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोक सकते हैं।

अध्ययन दल का नेतृत्व करने वाली अपर्णा गोम्स ने बताया कि अनुसंधान से कैंसर रोधी दवाओं के विकास के लिए कुछ संकेत मिले हैं। हमारा दल इस दिशा में प्रयासरत है।

वैज्ञानिक अब चूहों में त्वचा ट्यूमर और रक्त कैंसर के इलाज के लिए इंडियन मोनोसेलेट कोबरा और रसेल वाइपर के जहर का इस्तेमाल कर अध्ययन कर रहे हैं।

अपर्णा ने बताया कि साँप के जहर में कई तरह के जहरीले प्रोटीन और एंजाइम होते हैं। ये प्रोटीन मौत का कारण तो बनते ही हैं, लेकिन इनसे कैंसर और कई अन्य बीमारियों का इलाज भी हो सकता है।