मोदी स्टाइल, शाम को शहीदों को याद किया, रात को आतंकी कैंप तबाह कर दिए...

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत सरकार पर जवाबी कार्रवाई का बहुत ज्यादा दबाव था। 40 से ज्यादा सीआरपीएफ जवानों की शहादत के बाद लोगों में गुस्सा था वे सरकार से उम्मीद कर रहे थे कि से इस हमले का बदला लिया जाए।
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी हमले के बाद कहा था कि हमने सेना को खुली छूट दे दी है। इस हमले के जवाब के लिए सही समय और स्थान का चुनाव भारतीय सेना ही करेगी। इसके बाद बैठकों का दौर भी चला था। प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री राजनाथसिंह के बीच भी मैराथन मीटिंग हुई थी।

सबसे अहम बाद यह रही कि सोमवार शाम को प्रधानमंत्री मोदी ने शहीदों के सम्मान में दिल्ली में वॉर मेमोरियल (युद्ध स्मारक) का लोकार्पण किया था। 40 एकड़ में बने इस युद्ध स्मारक की लागत 176 करोड़ रुपए आई है और यह रिकार्ड एक साल में बनकर पूरा हुआ है। यह वॉर मेमोरियल करीब 22 हजार 600 जवानों के प्रति सम्मान का सूचक है, जिन्होंने आजादी के बाद से अनेकों लड़ाइयों में देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
इस कार्यक्रम में जब नरेन्द्र मोदी पूर्व सैनिकों को संबोधित कर रहे थे, तब देश में किसी को भी यह अनुमान नहीं था कि आज की रात पाकिस्तानी आतंकियों के लिए 'कहर की रात' होगी। रात 3.30 बजे के लगभग भारतीय वायुसेना के 12 विमानों ने पाकिस्तान के 80 किलोमीटर अंदर तक घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के कैंप को तबाह कर दिया। इस कैंप को जैश सरगना मसूद अजहर का साला मौलाना यूसुफ उर्फ उस्ताद गौरी चला रहा था। माना जा रहा है कि वह भी इस हमले में मारा गया है।

ध्यान रहे कि कारगिल हमले के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल‍ बिहारी वाजपेयी ने अंतरराष्ट्रीय सीमा का उल्लंघन ‍नहीं किया था, लेकिन एक बार फिर मोदी ने अंतरराष्ट्रीय सीमा लांघकर बता दिया कि बहुत हुआ, अब हम नहीं सहेंगे। अब इंतजार नहीं करेंगे। आतंकी हमलों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। नहीं मानोगे तो घर में घुसकर मारेंगे।

इस हमले के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को भी यह संदेश देने की कोशिश की है कि अब यह देश दुश्मन का 'पानीपत' तक आने का इंतजार नहीं करेगा, उसे भारत की सीमा में घुसने से पहले ही सबक सिखाया जाएगा।

 

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