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संविधान दिवस पर पीएम मोदी का विपक्ष पर बड़ा हमला, जानिए 10 खास बातें...

Updated: शुक्रवार, 26 नवंबर 2021 (12:16 IST)
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान दिवस के अवसर पर कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों पर परोक्ष रूप से हमला करते हुए कहा कि जो राजनीतिक दल अपना लोकतांत्रिक चरित्र खो चुके हैं, वह लोकतंत्र की रक्षा नहीं कर सकते हैं। पीएम मोदी के भाषण से जुड़ी खास बातें... 
 
1. राजनीतिक दलों का अपना महत्व : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘‘देश में एक संवैधानिक लोकतांत्रिक परंपरा है और इसमें राजनीतिक दलों का अपना एक महत्व है। राजनीतिक दल भी हमारे संविधान की भावनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का एक प्रमुख माध्यम हैं
 
2. ऐसे दल लोकतंत्र की रक्षा कैसे कर सकते हैं : जब सदन में इस विषय पर मैं 2015 में बोल रहा था, बाबा साहेब अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर इस कार्य की घोषणा करते समय तब भी विरोध आज नहीं हो रहा है उस दिन भी हुआ था, कि 26 नवंबर कहां से ले आए, क्यों कर रहे हो, क्या जरूरत थी।
 
3. संविधान की भावना को चोट पहुंची : संविधान की भावना को भी चोट पहुंची है, संविधान की एक-एक धारा को भी चोट पहुंची है, जब राजनीतिक दल अपने आप में अपना लोकतांत्रिक कैरेक्टर खो देते हैं। जो दल स्वयं लोकतांत्रिक कैरेक्टर खो चुके हों, वो लोकतंत्र की रक्षा कैसे कर सकते हैं।
 
4. भ्रष्‍टाचार का महिमामंडन : पीएम मोदी ने नाम लिए बगैर लालू यादव पर हमला करते हुए सवाल किया किया भ्रष्‍टाचार का महिमामंडन क्यों किया जा रहा है? 
 
5. पारिवारिक पार्टियां चिंता का विषय : भारत एक ऐसे संकट की ओर बढ़ रहा है, जो संविधान को समर्पित लोगों के लिए चिंता का विषय है, लोकतंत्र के प्रति आस्था रखने वालों के लिए चिंता का विषय है और वो है पारिवारिक पार्टियां। उन्होंने कहा कि योग्यता के आधार पर एक परिवार से एक से अधिक लोग जाएं, इससे पार्टी परिवारवादी नहीं बन जाती है लेकिन एक पार्टी पीढ़ी दर पीढ़ी राजनीति में है।
 
6. क्यों मना रहे हैं संविधान दिवस : नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस संविधान दिवस को इसलिए भी मनाना चाहिए, क्योंकि हमारा जो रास्ता है, वह सही है या नहीं है, इसका मूल्यांकन हो सके। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब अम्बेडकर की 125वीं जयंती थी, हम सबको लगा इससे बड़ा पवित्र अवसर क्या हो सकता है कि बाबासाहेब अम्बेडकर ने जो इस देश को जो नजराना दिया है, उसको हम हमेशा एक स्मृति ग्रंथ के रूप में याद करते रहें।
 
7. 1950 के बाद से ही हर साल मनाना चाहिए था : पीएम मोदी ने कहा कि संविधान के निर्माण में क्या हुआ, इसके बारे में सभी को शिक्षित करने के लिए 1950 के बाद हर साल संविधान दिवस मनाया जाना चाहिए था लेकिन कुछ लोगों ने ऐसा नहीं किया।
 
8. कर्तव्य बल का बोध होता तो अधिकारों की रक्षा होती : महात्मा गांधी ने आजादी के आंदोलन में अधिकारों के लिए लड़ते हुए भी देश को कर्त्तव्यों के लिए तैयार करने की कोशिश की थी। वे स्वदेशी, आत्मनिर्भर भारत विचार लाए थे। महात्मा गांधी देश को तैयार कर रहे थे। उन्होंने जो बीज बोए थे वे वटवृक्ष बन जाने चाहिए थे। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। अच्छा होता देश आजाद होने के बाद कर्त्तव्य पर बल दिया गया होता, तो अधिकारों की अपने आप रक्षा होती। 
 
9. मुंबई हमले को किया याद : पीएम मोदी ने कहा कि आज 26/11 हमारे लिए एक ऐसा दुखद दिवस है, जब देश के दुश्मनों ने देश के भीतर आकर मुंबई में आतंकवादी घटना को अंजाम दिया। भारत के अनेक वीर जवानों ने आतंकवादियों से लोहा लेते-लेते अपने आप को समर्पित कर दिया। मैं आज 26/11 को उन सभी बलिदानियों को भी आदरपूर्वक नमन करता हूं।
 
10. स्वतंत्रता सेनानियों को किया याद : अपने संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने संविधान निर्माताओं को श्रद्धांजलि दी स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया।
 

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