नासिक में कुंभ मेला शुरू, हजारों ने पवित्र डुबकी लगाई


त्र्यंबकेश्वर|
त्र्यंबकेश्वर। विश्वभर में आस्था के लिए लाखों लोगों के एकत्र होने के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन सिंहस्थ कुंभ का आज विधिवत रूप से शुभारंभ हो गया। ध्वजारोहण के एक परंपरागत समारोह के साथ हजारों लोगों ने दो शहरों में गोदावरी नदी में कुशावर्त और रामकुंड में डुबकी लगाई।
 
त्र्यंबकेश्वर में जहां गृहमंत्री और महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे ने समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर भाग लिया, वहीं राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नासिक के समारोह में उपस्थित रहे।
 
कुंभ को सबसे बड़े शांतिपूर्ण सम्मेलन के तौर पर जाना जाता है। हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से यह हर 12 साल में आयोजित होता है। कई अखाड़ों के साधु और लाखों श्रद्धालु इसमें भाग लेते हैं। कुंभ को धार्मिक वैभव और विविधता का प्रतीक भी माना जाता है।
 
यह उत्सव 58 दिनों तक चलेगा और 11 अगस्त को खत्म होगा।
 
त्र्यंबकेश्वर पुरोहित संघ के अध्यक्ष जयंत शिकरे ने बताया, ‘यह कोई आम डुबकी नहीं है बल्कि यह विश्वास और आस्था की डुबकी है, जो आपके जीवन की सारी बुराइयों को धो देती है और सौभाग्य लाती है।’
मेला आज से, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता>  
ध्वजारोहण समारोह के बाद देश के कई भागों से आए लाखों श्रद्धालुओं ने शिव मंदिर के पास स्थित कुशावर्त तीर्थ में डुबकी लगाई। त्र्यंबकेश्वर में शाही स्नान की तिथि 29 अगस्त, 13 और 25 सितंबर हैं जिसमें विभिन्न अखाड़े भाग लेंगे। लगभग तीन लाख लोगों के नासिक और त्र्यंबकेश्वर में इस धार्मिक आयोजन में पहुंचने की संभावना है। वहीं शाही स्नान की तिथियों पर नासिक में लगभग 80 लाख और त्र्यंबकेश्वर में 25-30 लाख लोगों के जुटने की संभावना है।
 
हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से जब माघ के महीने में सूर्य और बृहस्पति एक साथ सिंह राशि में प्रवेश करते हैं तब नासिक और त्र्यंबकेश्वर में कुंभ का आयोजन होता है।
 
दोनों शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं के आने-जाने के लिए नई सड़कों का निर्माण किया है।
 
नासिक में रामकुंड पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त घाटों का निर्माण किया गया है।
 
कुंभ मेले का आयोजन देश में चार स्थान हरिद्वार, इलाहाबाद (प्रयाग), नासिक और उज्जैन में होता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत के कुंभ से इन चारों स्थानों पर अमृत की कुछ बूंदें गिर गई थीं। कुंभ की अवधि में इन पवित्र नदियों में डुबकी लगाने से प्राणी मात्र के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। (भाषा)
 



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