Agnipath Scheme : सरकार ने योजना पर फैले मिथकों के लिए पेश किए सही तथ्य, कहा - 'अफवाहों पर ध्यान न दें'

Last Updated: शुक्रवार, 17 जून 2022 (17:17 IST)
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नई दिल्ली। अग्निपथ योजना की घोषणा होते ही देशभर में बवाल हो गया। इसके विरोध में मध्यप्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तरप्रदेश आदि राज्यों में युवाओं का उग्र प्रदर्शन जारी है। जगह-जगह पर सरकार की इस योजना के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं, ट्रैन और बसों में आग लगाई जा रही है। युवाओं का कहना है कि सेना के उच्चाधिकारियों से सलाह लिए बिना फैसला लिया गया, इस योजना से सेना में भर्ती होने वाले युवाओं का भविष्य खतरे में चला जाएगा, इससे सेना की दक्षता प्रभावित होगी आदि।

भारत सरकार ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक पोस्ट जारी की है, जिनमें सरकार ने युवाओं द्वारा पूछे गए ऐसे सभी सवालों को Myth (मिथक) बताते हुए कुछ Facts (तथ्य) साझा किए हैं और कहा है कि कृपया अफवाहों पर ध्यान ना दें।

मिथक नंबर 1 - 'अग्निवीरों' का भविष्य असुरक्षित है।

तथ्य - अग्निवीरों को केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) में प्राथमिकता दी जाएगी, 12वी उत्तीर्ण प्रमाणप्रत्र (Certificate) तथा व्यवसाय शुरू करने के लिए पैकेज और कम ब्याज दरों पर लोन दिया जाएगा।

मिथक नंबर 2 - अग्निपथ स्कीम से सेना की दक्षता प्रभावित होगी।
तथ्य - दुनिया के कई कई देशों द्वारा इस प्रक्रिया को सेना में युवाओं की भर्ती का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। अग्निवीरों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा और देखा जाए तो कुल भारतीय सेना में केवल 3 प्रतिशत ही अग्निवीर सैनिक होंगे।
मिथक नंबर 3 - सेना के अधिकारियों की सलाह के बिना योजना बनाई गई।
तथ्य - इस स्कीम के ड्राफ्ट को सर्वोच्च सैन्य अधिकारियों की समिति द्वारा फ्रेम किया गया है। कई पूर्व अधिकारियों ने भी अपनी सहमति देकर इसे स्वीकार किया है।
मिथक नंबर 4 - अग्निपथ स्कीम से युवाओं के लिए अवसर कम होंगे।
तथ्य - अग्निपथ योजना के चलते आने वाले 5 वर्षों में सैन्य भर्तियां 3 गुना बढ़ जाएंगी। युवाओं को पहले के मुकाबले सेना में भर्ती के ज्यादा अवसर प्राप्त होंगे।
मिथक नंबर 5 - अग्निवीर योजना समाज के लिए खतरा है, असंतुष्ट अग्निवीर देश विरोधी संगठनों का हिस्सा बन सकते हैं।
तथ्य - जो युवा 4 साल तक सेना की वर्दी पहनेंगे, वो जीवनभर अपने देश की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।



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