पुरानी पोस्ट के बाद नरवणे की पुस्तक पर बढ़ा बवाल, राहुल गांधी के दावे ने बढ़ाई सरकार की टेंशन, जानें क्या है पूरा सच
General Manoj Naravane Biography: पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की आत्मकथा 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' (Four Stars of Destiny) को लेकर सियासी संग्राम और बढ़ गया है। एक तरफ प्रकाशक पेंगुइन किताब के रिलीज न होने का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ राहुल गांधी ने जनरल नरवणे के ही एक पुराने सोशल मीडिया पोस्ट को हथियार बनाकर मोदी सरकार पर तीखे सवाल दागे हैं। आखिर उस ट्वीट में ऐसा क्या था जिसने इस विवाद में घी डालने का काम किया? आइए समझते हैं इस पूरे घटनाक्रम की इनसाइड स्टोरी।
क्या है नरवणे की पोस्ट में?
यह पोस्ट मनोज नरवणे ने 15 दिसंबर, 2023 में शेयर की थी। उन्होंने इसमें लिखा था- नमस्ते दोस्तो, मेरी किताब अब उपलब्ध है, बस लिंक पर क्लिक करें... वहीं, पुस्तक के प्रकाशक 'पेंग्विन' ने लिखा- हम विजय दिवस की तैयारी कर रहे हैं, आइए अपने देश के नायकों का सम्मान करने के लिए एक पल निकालें, जिसकी शुरुआत @ManojNaravane से करते हैं, जो 28वें थल सेनाध्यक्ष हैं और जिन्होंने दशकों तक भारत देश की सेवा की है। उनकी कहानी जानने के लिए, अभी प्री-ऑर्डर करें।
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क्या कहा था राहुल गांधी ने?
पुस्तक पर क्यों है विवाद?
हाल ही में (फरवरी 2026), लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सदन में इस किताब के कथित अंशों का हवाला दिया, जिसके चलते सदन में भारी हंगामा हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि किताब में 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद (गलवान घाटी संघर्ष) के दौरान सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच समन्वय और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स और लीक हुए अंशों के अनुसार, किताब में कुछ ऐसे विषयों पर चर्चा की गई है जो सरकार के लिए असहज हो सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, जनरल नरवणे ने अग्निपथ योजना की शुरुआत और सेना के शुरुआती रुख पर अपने विचार लिखे हैं। किताब में कथित तौर पर 31 अगस्त 2020 की उस रात का वर्णन है, जब गलवान में भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने हो गए थे। विपक्ष का दावा है कि नरवणे ने पुस्तक में नेतृत्व की 'अनिर्णय की स्थिति' का संकेत दिया है।
हाल ही में इस किताब की एक पीडीएफ कॉपी और कुछ अंश सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। प्रकाशक 'पेंगुइन' ने भी स्पष्ट किया है कि किताब अभी तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है और इसका कोई भी सर्कुलेशन अवैध है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala