असम में सियासी उबाल: हिमंता के 'पाकिस्तानी लिंक' के आरोपों पर गौरव गोगोई का करारा पलटवार, बच्चों के पासपोर्ट पर मचा बवाल
Assam Politics: असम की राजनीति में इस वक्त आरोप-प्रत्यारोप का ऐसा दौर चल रहा है जिसने राज्य के सियासी तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के बीच शुरू हुई यह जंग अब 'निजी हमले' और 'राष्ट्रीय सुरक्षा' के दावों तक पहुंच गई है।
विवाद की शुरुआत: सीएम का 'पाकिस्तानी लिंक' वाला धमाका
8 फरवरी 2026 को एक लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने SIT रिपोर्ट का हवाला देते हुए गौरव गोगोई और उनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई पर गंभीर आरोप लगाए।
आरोप: सीएम का दावा है कि गौरव गोगोई की 2013 की पाकिस्तान यात्रा 'संदिग्ध' थी और उनकी पत्नी के संबंध पाकिस्तानी एजेंटों से रहे हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा: हिमंता ने गोगोई को 'नेशनल थ्रेट' बताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने संसद में संवेदनशील सवाल पाकिस्तानी प्रभाव में पूछे।
गोगोई का पलटवार: "यह C-ग्रेड सिनेमा से भी बदतर है"
मुख्यमंत्री के आरोपों के कुछ ही घंटों बाद गौरव गोगोई ने मोर्चा संभाला और इसे सरकार की विफलता छिपाने का जरिया बताया।
SIT रिपोर्ट पर सवाल: गोगोई ने पूछा, "अगर मामला राष्ट्रीय सुरक्षा का था, तो सीएम 6 महीने तक फाइल दबाकर क्यों बैठे रहे? असल में SIT को कोई सबूत नहीं मिला, इसलिए वे डरे हुए हैं।"
बच्चों की निजता का उल्लंघन: गोगोई सबसे ज्यादा तब भड़के जब सीएम ने उनके 5 और 9 साल के बच्चों के पासपोर्ट की जानकारी साझा की। उन्होंने इसे 'किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act)' का उल्लंघन बताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
जमीन कब्जे का आरोप: गोगोई ने दावा किया कि उनकी 'परिवर्तन यात्रा' से सीएम घबरा गए हैं, क्योंकि कांग्रेस ने उनके परिवार द्वारा 12,000 बीघा जमीन और आदिवासियों की जमीन कॉर्पोरेट्स को देने का मुद्दा उठाया है।
क्या 2026 चुनाव की है तैयारी?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तीखी बयानबाजी 2026 के विधानसभा चुनावों की नींव तैयार कर रही है। जहां बीजेपी 'राष्ट्रवाद' और 'सुरक्षा' के मुद्दे को हवा दे रही है, वहीं कांग्रेस 'भ्रष्टाचार' और 'जमीन कब्जा' (Land Grab) के आरोपों के साथ मैदान में है।
गौरव गोगोई ने सीएम हिमंता पर यह भी आरोप लगाया है कि वे सोशल मीडिया वीडियो के जरिए एक खास समुदाय के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं और पुलिस को इस पर स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। असम की यह जंग अब दिल्ली की अदालतों और चुनाव आयोग के दरवाजों तक पहुंच सकती है। क्या ये आरोप चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएंगे या केवल सियासी शोर बनकर रह जाएंगे?
Edited by: Vrijendra Singh Jhala