लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, जानिए कैसे हटाया जाता है speaker को
no confidence motion against lok-sabha speaker om-birla: संसद के मौजूदा सत्र में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव प्रस्ताव (No confidence motion) लाने का नोटिस दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक स्पीकर को हटाना इतना आसान नहीं होता? संविधान के अनुच्छेद 94 और 96 के तहत इसकी एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है। 14 दिन के नोटिस से लेकर 'प्रभावी बहुमत' तक, विस्तार से समझिए हर एक बारीकी।
क्या है कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस ने लोकसभा ओम अध्यक्ष बिरला के खिलाफ यह नोटिस लोकसभा महासचिव को दिया है। इस प्रस्ताव को लाने के पीछे कांग्रेस का आरोप है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया गया। कांग्रेस ने स्पीकर की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाया है। उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने भी आरोप लगाया था कि मुझे बोलने नहीं दिया जा रहा है। इस प्रस्ताव पर विपक्ष के 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं।
कैसे लाया जाता है अविश्वास प्रस्ताव?
लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) को उनके पद से हटाना एक गंभीर संवैधानिक प्रक्रिया है। इसका वर्णन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 और 96 में किया गया है। लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, जिसे तकनीकी रूप से 'हटाने का संकल्प' भी कहा जाता है।
क्या है इसकी प्रक्रिया?
14 दिनों का पूर्व नोटिस : अविश्वास प्रस्ताव को पेश करने से पहले, अध्यक्ष को कम से कम 14 दिनों का लिखित नोटिस देना अनिवार्य है। इस नोटिस पर सदन के सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए।
सदन की अनुमति : जब 14 दिन की अवधि पूरी हो जाती है, तो प्रस्ताव सदन में रखा जाता है। इसे चर्चा के लिए स्वीकार करने के लिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है। यदि 50 सदस्य इसके पक्ष में खड़े होते हैं, तो प्रस्ताव पर चर्चा की तारीख तय की जाती है।
चर्चा और अध्यक्षता : जिस समय अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव पर विचार चल रहा हो, वह सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते। उनकी जगह उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) या पैनल का कोई अन्य सदस्य अध्यक्षता करता है। हालांकि, अध्यक्ष को सदन में उपस्थित रहने और कार्यवाही में भाग लेने और बोलने का पूरा अधिकार होता है। सामान्य दिनों में अध्यक्ष केवल 'टाई' होने पर (Casting Vote) वोट देते हैं, लेकिन अपने खिलाफ चल रहे अविश्वास प्रस्ताव के मामले में वह केवल पहली बार में वोट दे सकते हैं, 'कास्टिंग वोट' नहीं। पहली बार से तात्पर्य उन्हें सामान्य सांसद की तरह मतदान करने का हक मिलता है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala