पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक टू व्हीलर्स लोगों की पसंद बन रहे हैं। अगर आप भी इलेक्ट्रिक स्कूटी या स्कूटर खरीद रहे हैं तो आपको इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। किसी भी मॉडल और उसकी कीमत जानने से पहले यह आवश्यक है कि इलेक्ट्रिक स्कूटी की ऑन-रोड कीमत कैसे तय होती है और इसमें कौन-कौन से फैक्टर शामिल होते हैं।
भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर्स को मुख्य रूप से चार प्राइस सेगमेंट में बांटा जा सकता है:
बजट सेगमेंट (25,000 – 50,000 रुपए)
लो-स्पीड इलेक्ट्रिक स्कूटर्स (LSEVs) जो शहर में छोटी दूरी की यात्रा के लिए बेहतर हैं। इन स्कूटर्स के लिए रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस की जरूरत नहीं होती, इसलिए ये छात्रों और गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए आदर्श हैं।
मिड-रेंज सेगमेंट (50,000 – 1,00,000 रुपए)
एंट्री-लेवल हाई-स्पीड इलेक्ट्रिक स्कूटर्स जिनमें 60-100 किमी तक की रेंज और अच्छे फीचर्स मिलते हैं। यह रोजाना सफर करने वालों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।
प्रीमियम सेगमेंट (1,00,000 – 1,50,000 रुपए)
स्थापित ब्रांड्स के फीचर-लोडेड इलेक्ट्रिक स्कूटर्स। इनमें शानदार रेंज, स्मार्ट कनेक्टिविटी और बेहतर बिल्ड क्वालिटी मिलती है।
हाई-परफॉर्मेंस सेगमेंट (1,50,000 रुपए से अधिक)
टॉप-एंड मॉडल्स जिनमें 150+ किमी की रेंज, तेज एक्सेलरेशन, एडवांस फीचर्स और प्रीमियम डिजाइन मिलता है।
इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीदते समय केवल कीमत पर ध्यान देना सही फैसला नहीं माना जाता। बेहतर डील पाने के लिए ग्राहकों को बैटरी टेक्नोलॉजी, रेंज, चार्जिंग टाइम और मेंटेनेंस जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी ध्यान देना चाहिए। आइए जानते हैं वे प्रमुख फैक्टर्स
बैटरी टेक्नोलॉजी और लाइफस्पैन
लिथियम-आयन बैटरी
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वजन में हल्की
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3 से 5 साल तक लंबी लाइफ
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फास्ट चार्जिंग सपोर्ट
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कीमत अपेक्षाकृत ज्यादा
लीड-एसिड/जेल बैटरी
शुरुआती कीमत कम
वजन ज्यादा
2 से 3 साल तक की लाइफ
रिमूवेबल बनाम फिक्स्ड बैटरी
रिमूवेबल बैटरी चार्जिंग में अधिक सुविधा देती है
फिक्स्ड बैटरी बेहतर इंटीग्रेशन और डिजाइन प्रदान करती है
क्लेम्ड रेंज और वास्तविक रेंज में अंतर
कंपनियों द्वारा बताई गई रेंज की तुलना में वास्तविक रेंज आमतौर पर 60 से 80 प्रतिशत तक ही मिलती है। रेंज कई फैक्टर्स पर निर्भर करती है, जैसे-
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राइडर और सामान का वजन
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पहाड़ी या खराब रास्ते (रेंज में 20–30% तक कमी)
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स्पीड और राइडिंग स्टाइल
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मौसम की स्थिति
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बार-बार ब्रेक और एक्सेलरेशन
चार्जिंग टाइम और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
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स्टैंडर्ड होम चार्जिंग: लगभग 4 से 5 घंटे
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फास्ट चार्जिंग: प्रीमियम मॉडल्स में 2 से 4 घंटे में 0–80% चार्ज
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पोर्टेबल चार्जर: रिमूवेबल बैटरी वाले स्कूटर्स के लिए बेहद जरूरी
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पब्लिक चार्जिंग नेटवर्क: अभी सीमित, लेकिन तेजी से विस्तार हो रहा है
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टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप (TCO)
इलेक्ट्रिक स्कूटी की कुल लागत सिर्फ खरीदारी तक सीमित नहीं होती। इसमें कई अन्य खर्च भी शामिल होते हैं:
खरीद कीमत: ऑन-रोड कॉस्ट
बिजली खर्च : प्रति चार्ज लगभग 50 पैसे से 1.50 रुपये तक
मेंटेनेंस : पेट्रोल स्कूटर्स की तुलना में करीब 70% कम
बैटरी रिप्लेसमेंट : 3–5 साल बाद 10,000 से 70,000 रुपये तक खर्च
इंश्योरेंस : EVs के लिए थोड़ा सस्ता
रीसेल वैल्यू : लगातार बेहतर होती जा रही है।
रजिस्ट्रेशन और ड्राइविंग लाइसेंस और इंश्योरेंस
25 किमी/घंटे से कम रफ्तार : जिन इलेक्ट्रिक स्कूटरों/बाइक की मोटर क्षमता 250 वॉट से कम होती है, उन्हें 'नॉन-आरटीओ' (Non-RTO) माना जाता है। इनके लिए किसी रजिस्ट्रेशन, नंबर प्लेट या ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत नहीं होती है।
25 किमी/घंटे से अधिक रफ्तार : जिन वाहनों की क्षमता 250 वॉट से अधिक है, उनका आरटीओ (RTO) में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। इसके लिए ड्राइविंग लाइसेंस और वैध इंश्योरेंस भी जरूरी होता है।
इलेक्ट्रिक स्कूटी की ऑन-रोड कीमत में क्या शामिल होता है?
इलेक्ट्रिक स्कूटी की ऑन-रोड कीमत में एक्स-शोरूम प्राइस के अलावा कई अन्य चार्ज भी शामिल होते हैं:
एक्स-शोरूम कीमत: टैक्स और रजिस्ट्रेशन से पहले स्कूटर की बेस कीमत
रोड टैक्स : यह राज्य के अनुसार अलग-अलग होता है। आमतौर पर वाहन की कीमत का 2-10% तक होता है, हालांकि कई राज्यों में EVs पर 100% छूट दी जाती है
रजिस्ट्रेशन फीस : केंद्र सरकार ने बैटरी से चलने वाले वाहनों (BOVs) के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) जारी करने और रिन्यूअल फीस को माफ कर दिया है
इंश्योरेंस : थर्ड-पार्टी और कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस अनिवार्य होता है
हैंडलिंग चार्ज : डीलर द्वारा डॉक्यूमेंटेशन और डिलीवरी के लिए लिया जाने वाला शुल्क
Edited by : Sudhir Sharma