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विधायकों को अयोग्य ठहराने को लेकर आप का राष्ट्रपति पर हमला

Updated: सोमवार, 22 जनवरी 2018 (10:58 IST)
नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 'लाभ का पद' रखने को लेकर दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया है जिससे पार्टी को बड़ा झटका लगा है, वहीं पार्टी ने कहा कि यह दर्शाता है कि संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारी केंद्र सरकार की कठपुतली की तरह व्यवहार कर रहे हैं। कोविंद ने निर्वाचन आयोग द्वारा की गई सिफारिश को शनिवार को मंजूर कर लिया।
 
 
इस कदम पर प्रतिक्रिया जताते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया कि भगवान ने जब हमें 67 सीटें दीं, तो कुछ कारण रहा होगा। भगवान हमेशा हमारे साथ रहे अन्यथा हम कुछ नहीं होते... सच्चाई के रास्ते से नहीं भटके।
 
नजफगढ़ में एक सभा में उन्होंने कहा कि वे हर तरीके से हमें परेशान करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने मेरे कार्यालय पर सीबीआई से छापेमारी करवाई लेकिन 24 घंटे तक छापेमारी के बाद उन्हें केवल मेरे 4 मफलर मिले। हमारे विधायकों को गिरफ्तार किया गया।
 
केजरीवाल ने कहा कि उपराज्यपाल ने हमारी सरकार की 400 फाइलें मंगवाईं (2 वर्षों में लिए गए निर्णयों से जुड़े हुए) लेकिन उन्हें हमारे खिलाफ कुछ नहीं मिला। जब उन्हें हमारे खिलाफ कुछ नहीं मिला तो हमारे 20 विधायकों को रविवार को अयोग्य करार दे दिया। दिलचस्प है कि भाजपा नेता यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा ने भी आप का समर्थन किया है। यशवंत सिन्हा ने कहा कि यह फैसला तुगलकशाही के चरम को दर्शाता है।
 
पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने ट्वीट किया कि आप के 20 विधायकों को अयोग्य करार देने का राष्ट्रपति का आदेश नैसर्गिक न्याय की पूरी तरह से विफलता है। कोई सुनवाई नहीं, उच्च न्यायालय के आदेश का कोई इंतजार नहीं। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि आप के खिलाफ प्रतिशोध की राजनीति ज्यादा नहीं चलेगी।
 
आप के वरिष्ठ नेता आशुतोष ने कहा कि आप के विधायकों को अयोग्य घोषित करने का राष्ट्रपति का आदेश असंवैधानिक तथा लोकतंत्र के लिए खतरा है। उन्होंने ट्वीट किया कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को खुद सोचना चाहिए कि आप विधायकों की अयोग्यता पर हस्ताक्षर कर क्या भारत गणतंत्र के राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने इतिहास में अपना मान बढ़ाया है?
 
पार्टी की दिल्ली इकाई के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह मामला उसके 20 विधायकों तक सीमित नहीं है बल्कि लड़ाई लोकतंत्र की रक्षा करना और संवैधानिक संस्थाओं का क्षरण होने से बचाना है। चुनाव आयोग पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों से स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से काम करने की उम्मीद की जाती है न कि अपने आकाओं के राजनीतिक कठपुतली की तरह जो उनकी नियुक्ति करते हैं।
 
निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को सिफारिश की थी कि 13 मार्च 2015 और 8 सितंबर 2016 के बीच लाभ का पद रखने को लेकर 20 विधायक अयोग्य ठहराए जाने के हकदार हैं। संबंधित आप विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त किया गया था और याचिकाकर्ता प्रशांत पटेल ने कहा था कि यह उनके पास लाभ का पद है।
 
मुद्दे पर राष्ट्रपति को राय देते हुए निर्वाचन आयोग ने कहा था कि विधायकों ने ससंदीय सचिव का पद लेकर लाभ का पद हासिल किया और वे विधायक के रूप में अयोग्य ठहराए जाने के हकदार हैं। राष्ट्रपति निर्वाचन आयोग की सिफारिश को मानने के लिए बाध्य होते हैं। नियमों के तहत जनप्रतिनिधियों को अयोग्य ठहराए जाने की मांग को लेकर राष्ट्रपति को भेजी जाने वाली याचिकाएं निर्वाचन आयोग को भेज दी जाती हैं। निर्वाचन आयोग याचिकाओं पर फैसला करता है और अपनी सिफारिश राष्ट्रपति भवन को भेजता है, जो मान ली जाती है।
 
निर्वाचन आयोग ने राष्ट्रपति को भेजे गए अपने मत में कहा था कि संसदीय सचिव रहने वाले व्यक्ति ने लाभ लिया हो या न लिया हो या सरकार के अधिशासी कार्य में भागीदारी की हो या नहीं की हो, कोई फर्क नहीं पड़ता जैसा कि उच्चतम न्यायालय ने जया बच्चन के मामले में कहा था कि यदि पद लाभ के पद के तहत आता है तो अयोग्यता आसन्न होती है। आयोग ने कहा था कि वह अपना मत विगत की न्यायिक घोषणाओं, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम और संविधान के आधार पर दे रहा है।
 
अयोग्य ठहराए गए 20 विधायकों में आदर्श शास्त्री (द्वारका), अलका लांबा (चांदनी चौक), अनिल बाजपेयी (गांधीनगर), अवतार सिंह (कालकाजी), कैलाश गहलोत (नजफगढ़), जो मंत्री भी हैं, मदनलाल (कस्तूरबा नगर), मनोज कुमार (कोंडली), नरेश यादव (महरौली), नितिन त्यागी (लक्ष्मी नगर), प्रवीण कुमार (जंगपुरा), राजेश गुप्ता (वजीरपुर), राजेश ऋषि (जनकपुरी), संजीव झा (बुराड़ी), सरिता सिंह (रोहतास नगर), सोमदत्त (सदर बाजार), शरद कुमार (नरेला), शिवचरण गोयल (मोती नगर), सुखबीर सिंह (मुंडका), विजेन्द्र गर्ग (राजेन्द्र नगर) और जरनैल सिंह (तिलक नगर) शामिल हैं।
 
आप ने दिल्ली उच्च न्यायालय से भी संपर्क किया था और निर्वाचन आयोग की अधिसूचना पर रोक लगाने का आग्रह किया था। अदालत ने मामले को सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को आप विधायकों को अयोग्य किए जाने से बचाने के आग्रह पर कोई अंतरिम आदेश देने से इंकार कर दिया था।
 
20 अयोग्य विधायकों में से एक मदनलाल ने कहा कि सभी को अब न्यायपालिका से उम्मीद है और पार्टी मंगलवार को कुछ राहत की उम्मीद कर रही है। यदि आप अदालत से राहत पाने में विफल रहती है तो दिल्ली में 20 विधानसभा सीटों पर उपचनुाव होगा। अब केवल तकनीकी पहलू यह होगा कि दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष को 20 रिक्तियां अधिसूचित करनी होंगी जिससे कि निर्वाचन आयोग उपचुनाव की घोषणा कर सके।
 
विधानसभा द्वारा रिक्तियां घोषित किए जाने के बाद आप के विधायकों की संख्या 70 सदस्यीय विधानसभा में 66 से घटकर 46 रह जाएगी। हालांकि सरकार चलाने के लिए इसके पास बहुमत बरकरार रहेगा। 20 अयोग्य विधायकों में शामिल अलका लांबा ने कहा कि फैसला दुखद है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले राष्ट्रपति को उन्हें सुनना चाहिए था। याचिका 21 विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए दायर की गई थी लेकिन एक ने कुछ महीने पहले इस्तीफा दे दिया था। (भाषा)

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